आजादी के 79 साल बाद भी सड़क को तरसे बांका के तीन गांव, टापू जैसी जिंदगी जीने को मजबूर ग्रामीण
Banka News : बांका के जयपुर क्षेत्र में आज भी ऐसे गांव हैं, जहां सड़क नहीं बल्कि उबड़-खाबड़ पगडंडी ही लोगों की जिंदगी का सहारा है. बरसात में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों को चप्पल हाथ में लेकर सफर करना पड़ता है.
जयपुर (बांका) से लक्ष्मण कुमार मंटु की रिपोर्ट
Banka News : बांका जिले के जयपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत झारखंड सीमा से सटे तीन गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं. जयपुर पंचायत के खुर्द हजारी, कला हजारी और बुटातरी गांव के ग्रामीण वर्षों से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है. सड़क नहीं होने के कारण इन गांवों के लोग प्रतिदिन भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को प्रदर्शन कर सड़क निर्माण की मांग उठायी.
जंगल और नदी के बीच टापू बने गांव
स्थानीय लोगों के अनुसार, तीनों गांव झारखंड के जंगलों और नदी से घिरे हुए हैं. सड़क के अभाव में गांव टापू जैसी स्थिति में पहुंच चुके हैं. ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए झाड़ियों और गड्ढों से भरी पगडंडी से होकर गुजरना पड़ता है.लोगों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक किसी जनप्रतिनिधि या विभागीय अधिकारी ने इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर पहल नहीं की.
चार किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर लोग
ग्रामीणों ने बताया कि जयपुर-देवघर मार्ग तक पहुंचने के लिए करीब चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है. रास्ता इतना खराब है कि कई जगहों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है.पंचायत स्तर पर कुछ जगहों पर मिट्टी और मौरंग डाला गया था, लेकिन बरसात में वह भी बह गया. अब फिर से लोग पुराने बदहाल रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं.
बारिश में और बढ़ जाती है मुश्किल
ग्रामीणों ने कहा कि बरसात के मौसम में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है. कीचड़ और पानी से भरी पगडंडी पर चलने के दौरान लोगों को चप्पल हाथ में लेकर सफर करना पड़ता है.बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और बाजार से जरूरी सामान लाने में भी भारी कठिनाई होती है. कई बार आपात स्थिति में लोगों को घंटों तक संघर्ष करना पड़ता है.
सड़क नहीं बनी तो वोट बहिष्कार की चेतावनी
पक्की सड़क की मांग को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया. लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया, तो आगामी पंचायत चुनाव में तीनों गांव के लोग वोट बहिष्कार करने को मजबूर होंगे.ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता सड़क बनाने का आश्वासन देकर वोट लेते हैं, लेकिन बाद में गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता.प्रदर्शन में वार्ड सदस्य सुखू मरांडी, बेटका मरांडी, प्रेम मुर्मू, दिलीप हांसदा, बुद्धिलाल मरांडी, रंजीत टुडु, प्रदीप हांसदा, चुन्नीलाल मुर्मु, अमित मरांडी, राकेश मरांडी और मुनीलाल मरांडी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे.