श्रीकृष्ण-सुदामा की कथाओं ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

श्रीकृष्ण-सुदामा की कथाओं ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

बौंसी. नगर पंचायत क्षेत्र के सिरायं में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सातवें दिन अपने चरम पर पहुंच गयी, जहां पूरा वातावरण भक्ति, आस्था व भावनाओं से सराबोर नजर आया. इस विशेष दिन कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मणी के दिव्य विवाह प्रसंग के साथ-साथ सुदामा चरित्र का अत्यंत हृदयस्पर्शी वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. कथावाचक ने रुक्मणी विवाह प्रसंग को जीवंत करते हुए बताया कि सच्चा प्रेम, समर्पण व अटूट विश्वास ही भगवान तक पहुंचने का मार्ग है. वहीं सुदामा चरित्र के माध्यम से उन्होंने मित्रता, त्याग व भक्ति की महिमा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. सुदामा की निर्धनता व भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी निष्कलंक श्रद्धा का वर्णन सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गयी. रविवार को भी कथा प्रवचन पूरे उत्साह व श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया. इस दौरान कथा स्थल पर ब्रज की तर्ज पर होली उत्सव का भी भव्य आयोजन किया गया, जहां भक्ति गीत, नृत्य व संगीत के बीच श्रद्धालु झूम उठे. राधे-कृष्ण के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजायमान हो गया. कार्यक्रम के मुख्य यजमान अजय साह एवं उनकी धर्मपत्नी नीतू देवी हैं, जिनकी श्रद्धा व समर्पण से यह आयोजन भव्य रूप ले सका है. कथा स्थल पर भगवान की आकर्षक झांकियों ने भी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं. आयोजन की सफलता में समिति के अध्यक्ष मृणाल आनंद साह, उपाध्यक्ष अजय मंडल समेत सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा है. नगर पंचायत द्वारा साफ-सफाई व अन्य आवश्यक सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की गयी है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो. साथ ही प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों लोग प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं.

आज होगा श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन

कथा का समापन आज पूर्णाहुति हवन के साथ किया जायेगा. इस अवसर पर लल मटिया गांव निवासी पंडित धीरज शास्त्री के निर्देशन में रुद्राभिषेक का भी आयोजन होगा. आयोजन समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इस समापन समारोह में भाग लेने की अपील की है. सिरायं की यह भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी, बल्कि सामाजिक एकता, भक्ति व सांस्कृतिक समरसता का भी प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है.

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By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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