TB Free India Campaign : बांका जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान तेज कर दिया है. सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में बताया कि 30 जुलाई तक चलने वाले टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उच्च जोखिम वाले समुदायों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कर मरीजों की पहचान की जा रही है. उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित दवा और पूरा उपचार कराने से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है.
2.23 लाख लोगों की हुई जांच, 1339 मरीजों की पहचान
सिविल सर्जन ने बताया कि जिले में अब तक सक्रिय टीबी खोज अभियान के तहत 2,23,690 लोगों की जांच की जा चुकी है. जांच के दौरान 1339 टीबी मरीजों की पहचान कर उनका इलाज शुरू कराया गया. इनमें 667 मरीज उपचार पूरा कर स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 1137 मरीजों को निक्षय पोषण योजना का लाभ दिया जा रहा है. जिले की 66 पंचायतों में विशेष गतिविधियों के माध्यम से टीबी उन्मूलन अभियान संचालित किया जा रहा है.
हर मरीज को मिलते हैं 1000 रुपये प्रतिमाह
उन्होंने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत प्रत्येक टीबी मरीज के बैंक खाते में उपचार अवधि तक प्रतिमाह 1000 रुपये भेजे जाते हैं. इस राशि का उद्देश्य मरीजों को दूध, अंडा, दाल, हरी सब्जियां, फल और अन्य पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है, ताकि उनका पोषण बेहतर हो और वे जल्द स्वस्थ हो सकें.
जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त
सिविल सर्जन ने बताया कि लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना या बलगम में खून आने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए. पंचायत स्तर के उप स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और सदर अस्पताल में टीबी की जांच एवं इलाज पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध है. सरकारी अस्पतालों में बलगम जांच, सीबी-नैट, ट्रू-नैट, एक्स-रे सहित अन्य आवश्यक जांच की सुविधा भी उपलब्ध है.
निक्षय मित्र बनने की अपील
सिविल सर्जन ने समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शिक्षकों, जीविका समूहों और आम नागरिकों से टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिले में 260 निक्षय मित्र हैं, जो आवश्यकता की तुलना में कम हैं. अधिक से अधिक लोग निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लें और उनके पोषण एवं उपचार में सहयोग करें.
उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही पूरा किया जा सकता है. इसलिए हर नागरिक को जागरूकता फैलाने, संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए प्रेरित करने और समय पर उपचार सुनिश्चित कराने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए.
टीबी से बचाव और जरूरी बातें
- दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी होने पर तुरंत जांच कराएं.
- बलगम में खून, बुखार, रात में पसीना, वजन घटना और कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें.
- टीबी की जांच और इलाज सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पूरी तरह नि:शुल्क है.
- उपचार बीच में न छोड़ें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा पूरी करें.
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें, घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें तथा तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहें.
