शंभुगंज में 142 से अधिक सरकारी चापाकल खराब, पेयजल संकट गहराया; मरम्मत में सुस्त पीएचईडी

बांका के शंभुगंज प्रखंड में 142 से अधिक सरकारी चापाकल खराब होने से लोग भीषण पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं. दूषित पानी या पानी का पूरी तरह बंद होना ग्रामीणों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है.

शंभुगंज (बांका) से ठाकुर बिनोद का रिपोर्ट

Drinking Water Crisis: शंभुगंज (बांका). प्रखंड क्षेत्र की 19 पंचायतों में सरकारी चापाकलों के खराब होने से पेयजल संकट गहरा गया है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) द्वारा लगाए गए 142 से अधिक चापाकल या तो पूरी तरह बंद पड़े हैं या फिर दूषित पानी उगल रहे हैं. लगातार शिकायतों के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ रही है.

142 से अधिक चापाकल पड़े हैं खराब

जानकारी के अनुसार प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में करीब 142 सरकारी चापाकल खराब हैं. कई चापाकलों से पानी निकलना पूरी तरह बंद हो गया है, जबकि कई स्थानों पर कीचड़युक्त और दूषित पानी निकल रहा है. इससे स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है.

महिलाओं और बच्चों की बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि चापाकलों के खराब होने से महिलाओं और बच्चों को रोजाना दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है. भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में पेयजल की समस्या और गंभीर हो गई है. लोगों का कहना है कि समय पर मरम्मत कराना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है.

सरकारी दावों पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर पीएचईडी विभाग की उदासीनता के कारण लोगों को बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है. खराब चापाकलों की मरम्मत में हो रही देरी से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है.

क्या बोले अधिकारी

Drinking Water Crisis: पीएचईडी विभाग के कनीय अभियंता सुबोध कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद खराब चापाकलों की मरम्मत का कार्य तेजी से कराया जा रहा है. विभाग का प्रयास है कि सभी खराब चापाकलों को जल्द चालू कर लोगों को पेयजल संकट से राहत दिलाई जाए.

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By Pintu Pranav

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