सावन में हरी चूड़ियों की खनक ने जीता महिलाओं का दिल, जरकन कड़े और गोल्डन वर्क ने बढ़ाई बाजार की रौनक

सावन मास के आते ही बांका के बाजारों में हरियाली और चूड़ियों की खनक छा गई है. महिलाएं सौभाग्य और समृद्धि के प्रतीक हरी चूड़ियों और आकर्षक कड़ों की खरीदारी में व्यस्त हैं.

पवित्र सावन मास के आगमन के साथ ही बांका जिले के बाराहाट प्रखंड क्षेत्र के पंजवारा और आसपास के बाजारों में सावनी रौनक बढ़ गयी है. हर तरफ हरियाली की बहार के बीच हरी चूड़ियों और आकर्षक कड़ों की खनक से बाजार गुलजार नजर आ रहे हैं. सुबह से लेकर देर शाम तक चूड़ी दुकानों पर महिलाओं और युवतियों की भीड़ देखी जा रही है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में हरी चूड़ियां पहनना सौभाग्य, समृद्धि और भगवान शिव-माता पार्वती के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है. इसी आस्था और बदलते फैशन के संगम ने इस बार चूड़ी बाजार में खरीदारी को खास बना दिया है. सुहागिन महिलाओं के साथ युवतियां भी अपनी पसंद के डिजाइन और रंगों की चूड़ियां खरीदने पहुंच रही हैं.

जरकन कड़े और हरे-सफेद कॉम्बिनेशन की सबसे ज्यादा मांग

चूड़ी विक्रेताओं के अनुसार इस बार महिलाओं और युवतियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए बाजार में कई नये डिजाइन मंगाये गये हैं. जरकन वाले कड़े और हरे रंग के साथ सफेद चूड़ियों का कॉम्बिनेशन सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है. वहीं गोल्डन बॉर्डर वाले हरे कंगन और मैचिंग सेट भी पारंपरिक लुक के लिए खूब खरीदे जा रहे हैं.

बच्चों के लिए घुंघरू वाली चूड़ियों की भी अच्छी मांग है. इसके अलावा जैली चूड़ी, कांच के कड़े और रेड रोज चूड़ी भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं.

जयपुर और फिरोजाबाद की चूड़ियों का भी जलवा

बाराहाट और पंजवारा बाजार में जयपुर के प्रसिद्ध लैक वर्क यानी लहठी तथा उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की बारीक कांच की चूड़ियों की भी अच्छी मांग बनी हुई है. अलग-अलग डिजाइन और आकर्षक रंगों के कारण इन चूड़ियों को महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं.

महंगाई बढ़ी, फिर भी खरीदारी पर नहीं पड़ा असर

कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और परिवहन भाड़ा बढ़ने का असर फैंसी चूड़ियों की कीमतों पर भी पड़ा है. व्यापारियों के अनुसार इस बार अलग-अलग वैरायटी के प्रति सेट 10 से 30 रुपये तक महंगे हुए हैं. कांच और फैंसी सामग्री से तैयार चूड़ियों में परिवहन के दौरान करीब 10 से 15 प्रतिशत तक टूट-फूट होने से भी कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.

हालांकि सावन की आस्था और परंपरा के आगे महंगाई का असर कम दिखाई दे रहा है. महिलाएं अपनी पसंद की चूड़ियां और कड़े खरीदने में उत्साह दिखा रही हैं. बाजारों में दुकानों की जगमगाहट और चूड़ियों की खनक बता रही है कि बांका की महिलाएं सावन की परंपरा और संस्कृति को लेकर कितनी उत्साहित हैं.


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लेखक के बारे में

By गौरव कश्यप

गौरव कश्यप प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पंजवारा (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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