सरस्वती पूजा को लेकर बाजार में बढ़ी चहल-पहल, युवाओं में उत्साह का माहौल

जिलेभर में सरस्वती पूजा की तैयारियों को लेकर बढ़ी चहल-पहल से वसंत के आगमन का आभास होने लगा है.

By SHUBHASH BAIDYA | January 9, 2026 7:19 PM

सरस्वती प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं कलाकार

चंदन कुमार, बांका. जिलेभर में सरस्वती पूजा की तैयारियों को लेकर बढ़ी चहल-पहल से वसंत के आगमन का आभास होने लगा है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में सरस्वती पूजा को लेकर जोरदार तैयारियां चल रही हैं. इस जिले में सरस्वती पूजा का खास क्रेज है. यहां प्रायः हर मोहल्ले में मां सरस्वती की पूजा प्रतिमा स्थापित करके होती है. जिले में करीब छह हजार से ज्यादा सरस्वती प्रतिमाएं वसंत पंचमी के दिन प्रतिष्ठापित की जाती हैं और उनकी पूजा अर्चना होती है. इस दौरान विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन भी होते हैं. अनेक स्थानों पर खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होता है. सरस्वती पूजा की तैयारियों को लेकर दो-तीन सप्ताह पूर्व से ही यहां चहल-पहल काफी बढ़ गयी है. उत्साही युवाओं की टोलियां सरस्वती पूजा की तैयारियों में लग गयी हैं. उधर मां सरस्वती की प्रतिमाओं के निर्माण का सिलसिला भी तेज हो गया है.

कोलकाता के तर्ज पर तैयार हो रही है प्रतिमा

जिले के सैकड़ों गांवों में स्थानीय कुंभकार सरस्वती देवी की प्रतिमाएं निर्मित करते हैं. करीब दो दशक पूर्व तक यहां बनने वाली सरस्वती प्रतिमाएं सामान्य और देसी किस्म की होती थी. तब सुंदर और डिजाइनर प्रतिमाओं को स्थापित करने वाले इच्छुक युवा कोलकाता शहर से खरीद कर मूर्ति यहां लाते थे. अब स्थानीय स्तर पर ही कोलकाता की तर्ज पर डिजाइनर मूर्तियां यहां बनने लगी हैं. कुंभकार इन मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं. उधर सरस्वती पूजा को लेकर युवाओं की टोली अपनी-अपनी प्रतिमाओं को स्थापित करने की जगह सुरक्षित करने में लगे हैं. बांस-बल्ले से टेंट शामियाना लगाने का काम तेज हो गया है.

चंदा संग्रह के लिए युवाओं की टोली हुई सक्रिय

शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में जगह-जगह युवाओं द्वारा चंदा संग्रह का काम चल रहा है. चंदा संग्रह को लेकर युवाओं की टोली गांव में घूम-घूमकर लोगों से कलेक्शन कर रही है. इसके साथ ही गांव से बाहर में रहने व सरकारी नौकरी करने वालों से युवा मनचाहा चंदा की मांग कर रहे हैं, जबकि नौकरी पेशा वाले युवा सरस्वती पूजा के नाम पर अच्छा चंदा भी दे रहे हैं. वहीं जिला प्रशासन ने युवाओं को जबरन चंदा वसूली ना करने के लिए आगाह किया है. साथ ही किसी मार्ग पर वाहन आदि से चंदा वसूली करने पर कार्यवाही करने की बात भी कही है.

बसंत पंचमी से दिखने लगती है फागुन की छटा

विद्या की देवी की आराधना माघ माह की शुक्ल पंचमी अर्थात बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा की जाती है. माना जाता है इस दिन मां देवी सरस्वती का आविर्भाव हुआ था. यह तिथि वागीश्वरी जयंती और श्री पंचमी के नाम से भी जानी जाती है. इस दिन किसी भी काम को करना बहुत शुभ फलदायक होता है. इसलिए इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, नवीन व्यापार प्रारंभ और मांगलिक कार्य किये जाते हैं. इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते और साथ ही पीले रंग के पकवान बनाते हैं. मां सरस्वती ज्ञान, गायन-वादन और बुद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती इस दिन सरस्वती पूजा करना काफी शुभ माना जाता है. इस दिन छात्रों को पुस्तक और गुरु के साथ और कलाकारों को अपने वादन के साथ इनकी पूजा जरूर करनी चाहिए.

पूजा-अनुष्ठानों पर भी महंगाई का असर

इस वर्ष प्रतिमा निर्माण पर महंगाई का असर साफ नजर आ रहा है, क्योंकि प्रतिमा निर्माण में उपयोग हाेने वाली चिकनी मिट्टी व रंग के अलावा अन्य सामग्री पहले की तुलना में महंगी हो गयी है, जिस कारण मूर्तिकार अधिकतर छोटी मूर्तियों काे ही आकार देने में जुटे हैं. वहीं बड़ी मूर्तियां सिर्फ ऑर्डर पर ही बनायी जा रही है. मूर्तिकार कहते हैं कि पिछले तीन वर्षों में मिट्टी के मूल्यों में काफी उछाल आया है. कारीगर के अनुसार, हंस पर बैठी माता की प्रतिमा का दाम कुछ अलग है. वहीं कमल के फूल पर भी माता विराजमान हैं. सभी तरह की प्रतिमाओं के भाव अलग-अलग रखे गये हैं.

बसंत पंचमी का शुभ मुर्हूत

बसंत पंचमी 23 जनवरी को प्रात: 2 बजकर 28 मिनट परबसंत पंचमी तिथि समाप्त 24 जनवरी को प्रात: 01 बजकर 46 मिनट पर

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 13 मिनट से सुबह 10 बजकर 35 मिनट तक

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