Shravani Mela 2026 : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. भागलपुर से बाबा बासुकीनाथ धाम जाने वाले लाखों शिवभक्त भागलपुर-हंसडीहा मार्ग का उपयोग करते हैं. यह मार्ग 'फौजदारी बाबा' के नाम से प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ धाम तक पहुंचने का प्रमुख कांवरिया पथ माना जाता है. बावजूद इसके, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर प्रशासनिक सुविधाएं अब भी पर्याप्त नहीं हैं और कई स्थानों पर अतिक्रमण कांवरियों की परेशानी बढ़ा सकता है.
बाबा बासुकीनाथ जाने का प्रमुख कांवरिया मार्ग
भागलपुर-हंसडीहा मार्ग हर वर्ष श्रावणी मेले के दौरान लाखों कांवरियों की आस्था का केंद्र बन जाता है. सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बासुकीनाथ धाम पहुंचने वाले शिवभक्तों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है. विशेष रूप से डाक कांवरियों के लिए यह रास्ता सुविधाजनक माना जाता है, जिसके कारण पूरे सावन माह यहां श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रहती है.
स्वयंसेवी संस्थाओं के भरोसे रहती हैं कई व्यवस्थाएं
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इस मार्ग पर पुलिस गश्ती और स्वास्थ्य शिविर जैसी सीमित व्यवस्थाएं ही दिखाई देती हैं. कांवरियों के ठहरने, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाओं का बड़ा हिस्सा स्वयंसेवी संस्थाओं के सेवा शिविरों पर निर्भर रहता है. हर वर्ष की तरह इस बार भी विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं आकर्षक पंडाल, पेयजल, भोजन और विश्राम की व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटी हैं.
अतिक्रमण बन सकता है बड़ी परेशानी
श्रावणी मेले से पहले प्रशासन द्वारा मार्ग पर लगे पीएचईडी के चापाकलों को दुरुस्त कराया जा रहा है, लेकिन रजौन बाजार, पुंसिया बाजार और धौनी होटल के आसपास सड़क पर अतिक्रमण अब भी चिंता का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोगों का मानना है कि विशेषकर रविवार को जब डाक कांवरियों की संख्या अधिक रहती है, तब इन स्थानों पर जाम और भीड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से की त्वरित कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने रजौन के अंचलाधिकारी से मांग की है कि श्रावण मास शुरू होने से पहले कांवरिया पथ से अतिक्रमण हटाया जाए. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो लाखों श्रद्धालुओं को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा, पेयजल, विश्राम और यातायात व्यवस्था को भी और बेहतर बनाने की अपील की है, ताकि कांवरियों की यात्रा सुरक्षित और सुगम हो सके.
