राष्ट्रपति से सम्मानित हुईं कटोरिया निवासी शिक्षिका खुशबू कुमारी

कटोरिया की प्रधान शिक्षिका खुशबू कुमारी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया है. यह सम्मान उनके नवाचार, समर्पण और शिक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है. पुरस्कार को नई जिम्मेदारी की शुरुआत बताते हुए, उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास को जगाने पर जोर दिया.

कटोरिया (बांका). कटोरिया प्रखंड के राधानगर बाजार निवासी एवं उर्दू प्राथमिक विद्यालय बिदायडीह बांका की प्रधान शिक्षिका खुशबू कुमारी को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह-2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया. राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस प्रतिष्ठित सम्मान से कटोरिया सहित पूरे बांका जिले में खुशी और गर्व का माहौल है. समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक एवं नैतिक विकास पर समर्पित भाव से ध्यान देकर शिक्षक उत्कृष्ट विद्यार्थियों के साथ-साथ कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों की भावी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास होना चाहिए कि देश का एक भी विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर से वंचित न रहे. राष्ट्रीय स्तर पर खुशबू की हुई सराहना

खुशबू कुमारी ने अपनी मेहनत, समर्पण, नवाचार और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. सीमित संसाधनों के बीच भी विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने, उनकी प्रतिभा को निखारने और शिक्षा के प्रति रुचि पैदा करने की दिशा में उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है. लगातार मिल रही बधाईयां राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होने के बाद से ही खुशबू कुमारी को क्षेत्रवासियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों की ओर से लगातार बधाइयां मिल रही हैं. अब राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होने से उनके परिवार और क्षेत्र के लोगों का गौरव और बढ़ गया है. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मेरे सफर का अंत नहीं, एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है’

शिक्षिका खुशबू कुमारी ने कहा कि मेरे लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, समर्पण और उन अनगिनत छोटे-छोटे प्रयासों की स्वीकृति है, जिन्हें शायद उस समय किसी ने देखा भी नहीं था. एक शिक्षक के जीवन में ऐसे अनगिनत दिन आते हैं, जब हम पूरी निष्ठा और क्षमता के साथ बच्चों के लिए काम करते हैं, लेकिन उसका परिणाम तुरंत दिखाई नहीं देता. कभी किसी बच्चे को एक बात समझाने के लिए बार-बार प्रयास करना पड़ता है, कभी उसकी आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों को समझना पड़ता है और कभी बिना कुछ कहे केवल उसके साथ खड़े रहना ही उसके लिए सबसे बड़ी मदद बन जाता है. बच्चों के भीतर जगाया आत्मविश्वास इन्हीं अनुभवों ने मुझे सिखाया कि शिक्षक होना केवल किताबों का पाठ पढ़ाना नहीं है, बल्कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास जगाना, उनके सपनों को पहचानना और उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि वे भी जीवन में कुछ बड़ा कर सकते हैं. जब मुझे राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने की खबर मिली, तो खुशी और गर्व के साथ मेरे मन में सबसे पहले मेरे विद्यार्थियों के चेहरे आए. उस पल मुझे महसूस हुआ कि यह सम्मान मेरा अकेले का नहीं है. इसमें मेरे विद्यार्थियों का विश्वास, मेरे सहकर्मियों का सहयोग, मेरे परिवार का त्याग और उन सभी लोगों की शुभकामनाएं शामिल हैं, जिन्होंने मेरी इस यात्रा में किसी न किसी रूप में मेरा साथ दिया. शुभचिंतकों के प्रति आभार किया प्रकट

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार ने मुझे गौरवान्वित तो किया ही है, लेकिन उससे कहीं अधिक विनम्र और जिम्मेदार बनाया है. यह सम्मान मुझे याद दिलाता है कि अब मेरी जिम्मेदारी पहले से  बड़ी है. मुझे अपने विद्यार्थियों के साथ-साथ उन हजारों शिक्षकों के लिए भी बेहतर काम करते रहना है, जो बिना किसी अपेक्षा के हर दिन बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं. मैंने हमेशा महसूस किया है कि एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि उसके नाम के आगे जुड़ा कोई पुरस्कार नहीं, बल्कि उसके पढ़ाए हुए किसी बच्चे के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव है. यदि मेरे प्रयासों से किसी बच्चे में आत्मविश्वास आया, उसने अपने सपनों को पहचानना सीखा या अपने जीवन की दिशा बदलने का साहस पाया, तो मेरे लिए वही सबसे बड़ा पुरस्कार है. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मेरे सफर का अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है. मैं इस सम्मान को अपने सभी विद्यार्थियों, अपने विद्यालय, अपने परिवार, अपने सहकर्मियों और उन सभी शिक्षकों को समर्पित करती हूं, जिनके लिए शिक्षा आज भी केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य गढ़ने का माध्यम है. पीएम से आवास पर की थी मुलाकात शिक्षक दिवस से एक दिन पूर्व शुक्रवार की शाम शिक्षिका खुशबू कुमारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की थी. उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों संग पीएम ने सीधा संवाद किया था, जिसमें खुशबू कुमारी भी शामिल रही.

शिक्षिका खुशबू कुमारी को सम्मानित करती राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (एआई जेनरेटेड) | Prabhat Khabar Network

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लेखक के बारे में

By दीपक चौधरी

दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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