लाखों की लागत से बना खेल मैदान बना उपला सुखाने का केंद्र, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और युवाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर खेल मैदानों का निर्माण कराया जा रहा है.

गौरव कश्यप, पंजवारा. ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और युवाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर खेल मैदानों का निर्माण कराया जा रहा है. लेकिन लौढ़िया खुर्द पंचायत के बिक्रमपुर में निर्मित खेल मैदान अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से बने इस खेल मैदान पर आज तक किसी खेल प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया गया है. जिस ट्रैक पर खिलाड़ियों को दौड़ने और अभ्यास करने की सुविधा मिलनी चाहिए थी, वहां वर्तमान में उपले (गोबर के कंडे) सुखाए जा रहे हैं. मैदान की स्थिति को देखकर ग्रामीण सरकारी योजना की उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं. स्थानीय युवाओं का कहना है कि मैदान का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन इसके रखरखाव और उपयोग को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गयी. मैदान में खेल गतिविधियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण खिलाड़ी यहां अभ्यास करने में रुचि नहीं दिखाते हैं. नतीजतन, मैदान का उपयोग खेलकूद के बजाय अन्य कार्यों के लिए होने लगा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि मैदान का निर्माण स्थानीय खिलाड़ियों की जरूरतों और खेल गतिविधियों को ध्यान में रखकर किया जाता, तो यहां नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव होता. वर्तमान स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही है. ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने प्रशासन से खेल मैदान की स्थिति की जांच कराने तथा इसे खेल गतिविधियों के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकारी धन का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब मैदान का उपयोग खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए किया जाए.

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Author: SHUBHASH BAIDYA

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