काली मंदिर के पास दर्दनाक हादसे में 52 वर्षीय व्यक्ति की मौत

बौंसी-हंसडीहा मुख्य मार्ग पर शनिवार की सांझ एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया.

हाइवा से ओवरटेक की कोशिश बना मौत का कारण

अनियंत्रित बाइक ने ग्रामीण को मारा धक्का, मौके पर ही गयी जान

बौंसी. बौंसी-हंसडीहा मुख्य मार्ग पर शनिवार की सांझ एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया. नेशनल हाईवे पर स्थित सांझोतरी गांव के काली मंदिर के समीप हुए इस भीषण हादसे में 52 वर्षीय ग्रामीण गुरदयाल सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गयी. बताया जा रहा है कि झारखंड की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार हाइवा को ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान बाइक सवार की लापरवाही ने यह भयावह रूप ले लिया. और बाइक सवार ने अनियंत्रित होकर वहां मौजूद ग्रामीण को जोरदार धक्का मार दिया, जिसकी वजह से उनकी जान चली गयी.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही बाइक सवार ने हाइवा को ओवरटेक करने का प्रयास किया, उसका संतुलन बिगड़ गया और ग्रामीण को जोरदार धक्का मार दिया. हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बाइक सवार को पकड़ लिया और उसकी बाइक को भी जब्त कर लिया, हालांकि खबर लिखे जाने तक आरोपित बाइक सवार की पहचान नहीं हो पायी थी. घटना के बाद परिजन आनन-फानन में घायल गुरदयाल सिंह को रेफरल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर उत्तम कुमार ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार मच गयी. मृतक गुरदयाल सिंह जैन ट्रांसपोर्ट में मजदूरी करने के साथ-साथ खेती-बाड़ी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे. उनके असमय निधन से परिवार पूरी तरह टूट गया है. अस्पताल में उनकी पत्नी कमली देवी और छोटी बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं आसपास खड़े लोगों की आंखें भी नम हो गयी.

पांच बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

इस हादसे ने सिर्फ एक जान ही नहीं ली, बल्कि एक पूरे परिवार की नींव हिला दी. गुरदयाल सिंह अपने पीछे पांच बच्चों को छोड़ गये हैं. बड़ी बेटी पूजा (27) की शादी हो चुकी है, जबकि गुंजा (25), रेखा (23), लक्ष्मी (21), आरती (19) और 13 वर्षीय पुत्र अभी भी पिता के साए में पल रहे थे. अब इन सभी के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है. घटना की सूचना मिलते ही मृतक के भाई रामाकांत सिंह भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों को संभालने की कोशिश की, लेकिन माहौल इतना गमगीन था कि हर किसी की आंखें नम थीं. यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों की ओर इशारा करता है. एक छोटी सी चूक ने एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए दर्द और शोक में डुबो दिया.

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By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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