Banka News: बांका जिले के पंजवारा स्थित +2 इंटरस्तरीय हाईस्कूल में बुधवार को आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम ने छात्रों को यह सिखाया कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुएं भी उपयोगी और आकर्षक बन सकती हैं. ग्लोबल आर्ट्स सेंटर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार मुरली मनोहर भगत ने छात्र-छात्राओं को ‘वेस्ट से बेस्ट’ की अवधारणा, कूड़ा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक तरीके सिखाए. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं था, बल्कि छात्रों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, स्वच्छता की आदत और रचनात्मक सोच विकसित करना भी था. प्रशिक्षक ने बेकार पड़ी वस्तुओं से उपयोगी और सजावटी सामग्री तैयार करने का प्रदर्शन कर छात्रों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया.
बेकार वस्तुओं से तैयार की आकर्षक कलाकृतियां
कार्यक्रम के दौरान मुरली मनोहर भगत ने घरों में अनुपयोगी पड़ी वस्तुओं से सजावटी और उपयोगी सामग्री बनाने की विधि समझाई.
उन्होंने स्वयं विभिन्न कलाकृतियां तैयार कर छात्रों को चरणबद्ध तरीके से उनका निर्माण सिखाया. विद्यार्थियों ने प्लास्टिक, कागज, डिब्बों और अन्य अनुपयोगी सामग्री से रचनात्मक वस्तुएं बनाने की तकनीक सीखी.
‘वेस्ट से बेस्ट’ से स्वरोजगार की संभावना
मुरली मनोहर भगत ने छात्रों को बताया कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को रचनात्मक रूप देकर न केवल घर की सुंदरता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि इससे स्वरोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी इस कला को गंभीरता से सीखें, तो भविष्य में छोटे स्तर पर हस्तशिल्प और सजावटी वस्तुओं का निर्माण कर आय अर्जित कर सकते हैं.
पर्यावरण संरक्षण पर दिया विशेष जोर
अपने संबोधन में उन्होंने स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक के कम उपयोग और वृक्षारोपण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की.
उन्होंने छात्रों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, कचरे का उचित निस्तारण करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया.
छात्रों ने उत्साह के साथ लिया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रिंकू कुमारी, शिक्षक रूपेश कुमार सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहीं.
छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की और विभिन्न कलाकृतियां बनाने का अभ्यास किया. कई विद्यार्थियों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें पढ़ाई के साथ रचनात्मक और व्यावहारिक कौशल भी सिखाते हैं.
Banka News: भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों की मांग
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इसे ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और उपयोगी बताया.
सभी ने विद्यालयों में पर्यावरण, कला और कौशल विकास से जुड़े ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया.
