कुपात्र से नजर मिलाकर बात नहीं करनी चाहिए :गोस्वामी पीतांबरा

कुपात्र से नजर मिलाकर बात नहीं करनी चाहिए :गोस्वामी पीतांबरा

बौंसी. नगर पंचायत के बगडुम्बा में आयोजित श्रीमद् भागवत के नौवे दिन कथा वाचिका गोस्वामी पीतांबरा जी महाराज के द्वारा भगवान के कई रूपों की जानकारी दी गयी. भागवत कथा के दौरान भगवान श्री कृष्ण के 16108 रानियां के साथ विवाह वर्णन, सुदामा चरित्र, भगवान के 24 अवतारों का वर्णन के साथ-साथ ब्रज की फूलों की होली और समुद्र मंथन के प्रतीक मंदराचल पर्वत के बारे में भी श्रोताओं को विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी. कथावाचिका ने बताया कि भगवान श्री कृष्णा और सुदामा के मित्रता बेमिसाल है. इनकी मित्रता सिखाती है की सच्ची मित्रता में भौतिक संपत्ति का कोई महत्व नहीं होता. इस दौरान आकर्षक झांकी भी दिखाई गयी. कथा के दौरान भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान विभिन्न रूप में धर्म की स्थापना और मानव कल्याण के लिए धरती पर आते हैं. कथावाचक ने आज के दौर में पश्चिमी संस्कृति की ओर युवा पीढ़ी के रुझान को देखकर उन्होंने चिंता भी जाहिर की और कहा कि छोटे कपड़े और आधुनिक परिधान से बेहतर है की महिलाएं साड़ी पहन कर रहे ताकि बच्चों को आंचल का भी सुख प्राप्त हो सके. इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार साह और उनकी पत्नी नगर अध्यक्ष कोमल भारती मुख्य यजमान की भूमिका में मौजूद थे. आयोजन समिति के जुड़े अन्य सदस्य भी व्यवस्था को बेहतर करने के लिए तत्पर थे.

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By Shubhash baidya

सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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