बांका के शंभुगंज प्रखंड में गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार, जरूरी दवाओं और नियमित जांच में लापरवाही नवजात शिशुओं के लिए गंभीर खतरा बन रही है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम ने पिछले छह माह में करीब आधा दर्जन नवजातों में गंभीर जन्मजात विकृतियों की पहचान की है. इनमें हृदय में छेद और स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं. गंभीर मामलों को बेहतर इलाज के लिए पटना और अहमदाबाद भेजा गया है.
नरौन के 17 दिन के नवजात में मिली स्पाइनल कॉर्ड की विकृति
मालडीह पंचायत के नरौन गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 188 में स्वास्थ्य जांच के दौरान सिंटू कुमार के 17 दिन के नवजात पुत्र शिवांश राज में गंभीर विकृति पाई गई. आरबीएसके टीम के चिकित्सक डॉ. सगीर अहमद ने जांच के बाद बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की पुष्टि की. इसके बाद नवजात को बेहतर और उच्चस्तरीय उपचार के लिए आईजीआईएमएस, पटना रेफर किया गया.
फोलिक एसिड की कमी से हो सकता है न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट
डॉ. सगीर अहमद ने बताया कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में फोलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा नहीं मिलने से न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट जैसी जन्मजात समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. भ्रूण के शुरुआती विकास में स्पाइनल कॉर्ड और तंत्रिका तंत्र का निर्माण होता है, इसलिए गर्भधारण से पहले और शुरुआती गर्भावस्था में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फोलिक एसिड का सेवन महत्वपूर्ण माना जाता है.
छह माह में आधा दर्जन नवजातों की पहचान
आरबीएसके टीम के अनुसार शंभुगंज प्रखंड में पिछले छह माह के दौरान करीब आधा दर्जन नवजातों में गंभीर जन्मजात विकृतियों की पहचान की गई है. इनमें हृदय में छेद और स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी विकृतियां प्रमुख हैं. गंभीर स्थिति वाले बच्चों को विशेषज्ञ उपचार के लिए पटना और अहमदाबाद जैसे उच्चस्तरीय चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया है.
सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं जरूरी दवाएं
सीएचसी प्रभारी डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के साथ चिकित्सकों की सलाह के अनुसार दवाओं और पोषण संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए.
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मुफ्त जांच
सीएचसी प्रभारी ने बताया कि प्रत्येक माह प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की मुफ्त स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था की जाती है. महिलाओं से अपील की गई है कि वे नियमित रूप से स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें और गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सकों से सलाह लें.
समय पर जांच और पोषण पर जोर
स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड जैसी जरूरी दवाओं का सेवन और नियमित जांच मां एवं शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. किसी भी दवा का सेवन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए.
