मंदार की धार्मिक धरती एक बार फिर भगवान मधुसूदन की भक्ति में सराबोर होने को तैयार है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मंदार स्थित प्राचीन भगवान मधुसूदन मंदिर में 4 सितंबर की रात जन्मोत्सव का आयोजन होगा. इसके अगले दिन 5 सितंबर की सुबह मंदिर परिसर में वर्षों पुरानी दही कादो की परंपरा निभायी जाएगी. जन्मोत्सव और दही कादो को लेकर मंदिर परिसर में साफ-सफाई, सजावट और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप देने की कवायद शुरू हो गयी है. पर्व को लेकर मंदार और आसपास के गांवों में श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह है.
जन्मोत्सव के बाद शुरू होगी दही कादो की परंपरा
मंदार में जन्माष्टमी का उत्सव सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव तक सीमित नहीं रहता. 4 सितंबर की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद 5 सितंबर की सुबह भगवान मधुसूदन मंदिर में दही कादो उत्सव मनाया जाएगा. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.
दही कादो में दूर-दराज के गांवों से श्रद्धालु दही लेकर मंदिर पहुंचते हैं और भगवान मधुसूदन के श्रीचरणों में दही अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं. सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ जुटने लगती है. भगवान मधुसूदन के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है.
दही से सराबोर हो जाता है मधुसूदन का दरबार
दही कादो उत्सव का सबसे आकर्षक दृश्य भगवान मधुसूदन को दही अर्पित करने का होता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के दही चढ़ाने से भगवान की प्रतिमा और आसपास का हिस्सा दही से सराबोर हो जाता है. भक्त इसे भगवान के प्रति प्रेम, आस्था और समर्पण का प्रतीक मानते हैं.
उत्सव के दौरान श्रद्धालु एक-दूसरे को भी दही लगाते हैं. इससे मंदिर परिसर में धार्मिक आस्था के साथ उल्लास और उमंग का माहौल बन जाता है. दही कादो का यह अनूठा दृश्य हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है.
कृष्ण भक्ति और लोक परंपरा का अनोखा संगम
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का दूध, दही और मक्खन से विशेष संबंध माना जाता है. इसी आस्था की अभिव्यक्ति मंदार के दही कादो उत्सव में देखने को मिलती है. यहां यह आयोजन धार्मिक अनुष्ठान के साथ स्थानीय लोक परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.
हर वर्ष दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु इस अनूठे उत्सव में शामिल होने मंदार पहुंचते हैं. इस बार भी बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ शुरू होने वाला भक्ति और उल्लास का सिलसिला अगले दिन 5 सितंबर की सुबह दही कादो उत्सव के साथ अपने चरम पर पहुंचेगा. मंदार में एक बार फिर कृष्ण भक्ति, आस्था और लोक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा.
