चिलचिलाती धूप भी नहीं रोक सकी कांवरियों के कदम, श्रावणी मेले के 13वें दिन ‘बोल बम’ से गूंजा कांवरिया पथ

भयंकर गर्मी के बावजूद, श्रावणी मेले के 13वें दिन कांवरियों का उत्साह 'बोल बम' के जयघोषों के साथ गूंजता रहा. बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट आस्था ने तपती धूप को भी बौना साबित कर दिया. सेवा शिविरों ने श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत दी और उनकी यात्रा को सुगम बनाया.

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के 13वें दिन मंगलवार को कांवरिया पथ पर आस्था, तपस्या और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला. सुबह नौ बजे के बाद चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी ने कांवरियों की कठिन परीक्षा ली, लेकिन बाबा भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था और भक्ति के आगे गर्मी की तपिश भी फीकी पड़ती नजर आयी. कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिवभक्त बिना रुके और बिना डिगे बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर की ओर बढ़ते रहे.

गर्मी के बीच गूंजता रहा ‘बोल बम’ का जयघोष

कांवरिया पथ पर दिनभर ‘बोल बम का नारा है, बाबा एक सहारा हैं’, ‘बाबा नगरिया दूर है, जाना जरूर है’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे. कांवरियों की टोलियां पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ आगे बढ़ती रहीं. किसी के चेहरे पर यात्रा की थकान दिखी तो किसी के कंधे पर कांवर का भारी बोझ था, लेकिन बाबा के दर्शन की चाहत ने उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ने की ताकत दी.

तपती दोपहरी में थमे कदम, छांव में मिला सुकून

दोपहर करीब 12 बजे से दो बजे तक तेज धूप और भीषण गर्मी का असर सबसे अधिक रहा. इस दौरान बड़ी संख्या में कांवरियों ने पथ पर चलने के बजाय पंडालों, पेड़ों की छांव, टेंट सिटी, सरकारी एवं निजी धर्मशालाओं और सेवा शिविरों में कुछ समय विश्राम किया. गर्मी से राहत के लिए जगह-जगह पानी, शर्बत, भोजन और चिकित्सा सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी गयीं.

सेवा शिविर बने कांवरियों के लिए राहत का सहारा

कांवरियों की सुविधा के लिए प्रशासन और विभिन्न सेवा समितियों की ओर से जगह-जगह लगाये गये सेवा शिविर गर्मी के बीच बड़ा सहारा बने. यहां श्रद्धालुओं ने कुछ देर आराम किया और शरीर को राहत मिलने के बाद दोबारा कांवर उठाकर बाबा की नगरी की ओर प्रस्थान किया. सेवा शिविरों में मौजूद स्वयंसेवक भी कांवरियों की सेवा में जुटे रहे.

जिलेबिया मोड़ से दुम्मा तक छांव में विश्राम

कांवरिया पथ के जिलेबिया मोड़, टंगेश्वर, सुईया पहाड़, अबरखा, सतलेटवा, तरपतिया, दुल्लीसार, विश्वकर्मानगर, जमुआ मोड़, राजबाड़ा, कोल्हुआ, देवासी, लक्ष्मणझूला, इनारावरण, हथगढ़, गोड़ियारी और दुम्मा सहित विभिन्न स्थानों पर कांवरिये धूप के समय पंडालों और पेड़ों की छांव में विश्राम करते नजर आये.

धूप पर भारी पड़ी बाबा भोलेनाथ के प्रति आस्था

गर्मी और लंबी दूरी की थकान के बावजूद शिवभक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. विश्राम के बाद कांवरिये फिर ‘बोल बम’ का जयघोष करते हुए देवघर की राह पर निकल पड़े. कांवरिया पथ पर उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ यह संदेश देती नजर आयी कि आस्था के पथ पर मौसम की तपिश भी भक्तों के कदम नहीं रोक सकती.

श्रावणी मेले के 13वें दिन कांवरिया पथ पर भक्ति, सेवा और समर्पण का ऐसा नजारा देखने को मिला, मानो हर कांवरिये की जुबां पर एक ही संकल्प हो—बाबा की नगरी पहुंचना है और बाबा बैद्यनाथ का दर्शन करना है.

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लेखक के बारे में

By दीपक चौधरी

दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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