न्यायालय की गरीमा बनायें रखना अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी : प्रधान जिला जज

बांका व्यवहार न्यायालय परिसर में बार काउंसिल ऑफ इंडिया अधिवक्ता अधिनियम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुई.

बांका से नवनीत कुमार की रिपोर्ट Banka News : बांका व्यवहार न्यायालय परिसर में बार काउंसिल ऑफ इंडिया अधिवक्ता अधिनियम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुई. जिसमें प्रधान जिला जज सत्यभूषण आर्य के द्वारा सभी न्यायिक पदाधिकारियों सहित अधिवक्ताओं को अधिवक्ता अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी गयी. प्रधान जिला जज ने कहा कि अधिवक्ताओं को न्यायालय के अधिकारी के रूप में कैसा व्यवहार करना चाहिए, और न्यायालय, मुवक्किलों, विरोधियों एवं सहकर्मियों के प्रति उनके सख्त कर्तव्यों को रेखांकित करते हैं. इन नियमों के अनुसार, अधिवक्ताओं को पूर्ण सत्यनिष्ठा, गरिमा और व्यावसायिकता बनाये रखना अनिवार्य है. कहा कि गत होली मिलन समारोह के दौरान यूपी कानपुर कचहरी परिसर में अश्लील नृत्य, गीत- संगीत का वीडियो वायरल हुआ है. जिससे न्याय की मंदिर की गरीमा धूमिल हुई है. जिस पर सुप्रीम कोर्ट महिला वकील संघ के वरीय अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी के द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज की गयी थी. जिस मामले में आगे हमसबों को गरीमा में रहकर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित करना है.

वकीलों को हमेशा अदालत में निर्धारित, शालीन पोशाक में ही उपस्थित होना चाहिए

प्रधान जिला जज ने कहा कि अधिवक्ताओं को किसी भी अदालत या न्यायाधिकरण के समक्ष आत्मसम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करना चाहिए. अधिवक्ताओं को लंबित मामलों के संबंध में न्यायाधीशों से निजी तौर पर संपर्क नहीं करना चाहिए. वकीलों को हमेशा अदालत में निर्धारित, शालीन पोशाक में ही उपस्थित होना चाहिए. और अपने मुवक्किल के हितों की रक्षा करनी चाहिए. वकीलों को मुकदमे की सफलता पर निर्भर शुल्क लेने या कार्यवाही से प्राप्त राशि में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं है. वकीलों को अपने पेशेवर कार्यकाल के दौरान अपने मुवक्किलों द्वारा उन्हें किये गये किसी भी संचार का खुलासा नहीं करना चाहिए. इसके अलावा अधिवक्ताओं को विरोधी वकील और पक्षों के खिलाफ अपमानजनक हमलों, अभद्र भाषा और अनुचित व्यवहार से बचना चाहिए. काम मांगने या अपनी सेवाओं का विज्ञापन करना भी मनाही है. यदि पीठासीन न्यायाधीश या न्यायाधिकरण का सदस्य किसी मामले का करीबी रिश्तेदार है, तो वकील उस मामले में कार्य नहीं कर सकते, पैरवी नहीं कर सकते या उपस्थित नहीं हो सकते. वकालत करते समय वकील पूर्णकालिक वेतनभोगी कर्मचारी नहीं हो सकते हैं. कार्यक्रम को डीएलएसए सचिव सपना रानी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व सचिव ने भी संबोधित किया. इस मौके पर अन्य न्यायिक अधिकारी सहित अधिवक्ता मौजूद थे.

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Author: MD. TAZIM

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