सरकारी स्कूलों में अब जींस-टीशर्ट पर रोक, फॉर्मल ड्रेस अनिवार्य, सोशल मीडिया रील बनाने पर भी सख्ती

Banka School News : बांका जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू हो गया है. अब जींस-टीशर्ट पहनकर स्कूल आना मना है और सोशल मीडिया रील बनाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. यह पहल विद्यार्थियों में अनुशासन बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है.

Banka School News : बांका जिले के सरकारी विद्यालयों में अब शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को फॉर्मल ड्रेस में ही विद्यालय आना होगा. जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) के निर्देश के बाद शुक्रवार से कई स्कूलों में इसका पालन शुरू हो गया. नए आदेश के तहत जींस-टीशर्ट जैसे कैजुअल परिधान के साथ विद्यालय परिसर में सोशल मीडिया रील और गैर-शैक्षणिक वीडियो बनाने पर भी रोक लगा दी गई है.

फॉर्मल ड्रेस में नजर आए शिक्षक, आदेश का दिखा असर

डीईओ के निर्देश के बाद बौसी बाजार स्थित एलएनडी प्रोजेक्ट बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय सहित कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षिकाएं औपचारिक परिधान में नजर आए. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालय की गरिमा, अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए सभी शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को निर्धारित फॉर्मल ड्रेस का पालन करना होगा.

विभाग ने चेतावनी दी है कि आदेश की अवहेलना करने वाले कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.

रील, डीजे और गैर-शैक्षणिक वीडियो पर भी प्रतिबंध

नए निर्देश के अनुसार विद्यालय परिसर में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए डांस रील, डीजे, डिस्को अथवा किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षणिक वीडियो बनाने और उसमें भाग लेने पर पूरी तरह रोक रहेगी.

हालांकि, शैक्षणिक कैलेंडर के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नृत्य, संगीत और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों की अनुमति पूर्व की तरह जारी रहेगी.

'शिक्षक समाज के आदर्श होते हैं'

एलएनडी प्रोजेक्ट बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय के प्रधानाचार्य पवन कुमार त्रिभुवन ने बताया कि शिक्षा विभाग समय-समय पर शिक्षकों के पहनावे और आचरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी करता रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के आदर्श होते हैं और उनके व्यक्तित्व, व्यवहार तथा पहनावे का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ता है.

उन्होंने कहा कि बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों में भी शिक्षक को समाज का मार्गदर्शक, संस्कृति का संवाहक और नैतिक मूल्यों का प्रेरक माना गया है. ऐसे में शिक्षकों का आचरण विद्यार्थियों के लिए अनुकरणीय होना चाहिए.

विद्यार्थियों में अनुशासन बढ़ाने की पहल

शिक्षा विभाग का मानना है कि जब शिक्षक स्वयं ड्रेस कोड और अनुशासन का पालन करेंगे, तभी विद्यार्थियों में भी विद्यालयी अनुशासन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी. इसी उद्देश्य से डीईओ ने सभी विद्यालय प्रधानों को निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है.


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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार पाठक प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बौंसी (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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