कड़ाके की ठंड में सफा अनुयायियों का पापहारिणी सरोवर में आस्था-स्नान
कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच सफा संप्रदाय के अनुयायियों की आस्था डगमगा नहीं रही
बौंसी. कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच सफा संप्रदाय के अनुयायियों की आस्था डगमगा नहीं रही. शनिवार प्रातः बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र पापहारिणी सरोवर में विधि-विधान के साथ स्नान कर सनातन धर्म की अटूट परंपराओं का पालन किया. ठंड से कंपकंपाते वातावरण में श्रद्धालुओं का यह आस्था-स्नान धार्मिक श्रद्धा, तप और विश्वास का अनुपम उदाहरण बन गया. प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सरोवर तट पर आगमन शुरू हो गया था. वैदिक मंत्रोच्चार, जयघोष और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच अनुयायियों ने पवित्र जल में स्नान किया. मान्यता है कि पापहारिणी सरोवर में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है तथा जीवन में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. सफा संप्रदाय की गुरु माता रेखा हेंब्रम,संतों और वरिष्ठ अनुयायियों ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर वर्ष मकर संक्रांति के पूर्व यहां पर पर आस्था-स्नान किया जाता है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अनुशासन, त्याग और आत्मशुद्धि का मार्ग है, जिसे इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान जीवंत बनाए रखते हैं. स्थानीय नागरिकों और धर्मप्रेमियों ने इस आयोजन को सनातन संस्कृति की निरंतरता और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया. उनका कहना है कि आधुनिक जीवनशैली के बीच ऐसे धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं. आस्था, परंपरा और अनुशासन के इस संगम ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा के आगे मौसम की कठोरता भी बाधा नहीं बन सकती.
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