रजौन में रिटायर्ड शिक्षक ही चला रहे डीएन सिंह कॉलेज, कई विभाग तो भगवान भरोसे
Banka News : बांका के चर्चित डीएन सिंह महाविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी अब शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ने लगी है. कई विभागों में एक-एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है, जबकि हिंदी, गणित और राजनीति शास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं है.
रजौन (बांका) से पीयूष कुमार की रिपोर्ट
Banka News : बांका जिले के रजौन प्रखंड स्थित डीएन सिंह महाविद्यालय इन दिनों शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है. लगातार हो रही सेवानिवृत्ति के बावजूद रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है. हालात ऐसे हैं कि कई विभाग एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ महत्वपूर्ण विभागों में नियमित शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं. कॉलेज प्रशासन फिलहाल रिटायर्ड शिक्षकों की सेवाएं लेकर व्यवस्था संभालने की कोशिश कर रहा है.
एक शिक्षक के भरोसे चल रहे कई विभाग
महाविद्यालय में रसायन विज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र और इतिहास जैसे प्रमुख विभागों में केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं. ऐसे में शिक्षण कार्य के साथ विभागीय जिम्मेदारियों का पूरा भार एक ही शिक्षक पर आ गया है. इससे छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
हिंदी, गणित और राजनीति शास्त्र विभाग में नहीं है कोई शिक्षक
स्थिति और भी गंभीर तब नजर आती है जब हिंदी, गणित और राजनीति शास्त्र जैसे प्रमुख विषयों में एक भी नियमित शिक्षक कार्यरत नहीं है. सभी शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उनके स्थान पर नई नियुक्तियां नहीं की गई हैं. छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कॉलेज प्रबंधन 11 महीने के संविदा आधार पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं ले रहा है.
शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की कमी से प्रशासनिक कार्य प्रभावित
महाविद्यालय में केवल शिक्षकों की ही नहीं, बल्कि शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की भी भारी कमी है. पुस्तकाध्यक्ष, प्रधान लिपिक, सहायक लिपिक और चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं. इसके कारण प्रशासनिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ अन्य कर्मचारियों पर आ गया है, जिससे कार्य निष्पादन प्रभावित हो रहा है.
बहाली नहीं होने से युवाओं में भी नाराजगी
स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों का कहना है कि यदि नियमित बहाली प्रक्रिया अपनाई जाती तो योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलता और कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था भी मजबूत होती. लेकिन रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं होने से न केवल बेरोजगार युवाओं की उम्मीदें प्रभावित हुई हैं, बल्कि छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है.
शासी निकाय गठन के बाद होगा समाधान : प्राचार्य
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी को दूर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में शासी निकाय के नए गठन की प्रक्रिया चल रही है. इसके पूरा होने के बाद रिक्त पदों और अन्य प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.