शंभुगंज. रामायण में सीताराम विवाह की कथा धर्म, मर्यादा, त्याग और निस्वार्थ प्रेम का संदेश देता है. मानव का सच्चा प्रेम वह है जो विषय परिस्थितियों में भी धर्म पालन पर बल देता है. उक्त बातें पकरिया गांव के राम जानकी मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय नवाह परायण में पधारे अयोध्या की कथावाचिका सरस्वती पांडेय ने कही. उन्होंने बताया कि रामायण की कथा मानव को सत्य, मर्यादा, धर्म पथ पर चलने के लिए सिखाती है. सीताराम विवाह के पश्चात सुख वैभव को छोड़ कर वन प्रस्थान इत्यादि त्याग को दर्शाता हैं. अंत में उन्होंने बताया कि रामायण सनातन धर्म का सबसे बड़ा महासागर हैं. कथा के बीच-बीच में भजन और रासलीला व झांकी देख श्रोता गदगद हो रहे हैं. वहीं चौबीस घंटे के राम नाम का जाप सहित प्रत्येक दिन शाम को भव्य आरती का आयोजन हो रहा हैं. जहां पकरिया गांव के अलावा झखरा, चौतरा एवं रुदपैय महारुद्र यज्ञ में भी ज्ञान की गंगा बह रही है. पकरीया गांव में मुख्य आचार्य अजय कुमार सिंह, आचार्य मुखिया दीपक कुमार सिंह, धुर्व सिंह, श्रवण सिंह, पुरूषोत्तम सिंह, धर्मेन्द्र कुमार सिंह, धनराज उर्फ मुन मुन सिंह सहित सभी ग्रामीणों के सहयोग से कार्यक्रम हो रहा है.
पकरिया के राम जानकी परिसर में सीता-राम की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
रामायण में सीताराम विवाह की कथा धर्म, मर्यादा, त्याग और निस्वार्थ प्रेम का संदेश देता है. मानव का सच्चा प्रेम वह है जो विषय परिस्थितियों में भी धर्म पालन पर बल देता है
