चांदन नदी में करोड़ों का रिंग बांध टूटा, 2600 साल पुराने इतिहास पर मंडराया खतरा

Banka News : जिस रिंग बांध को चांदन नदी के गर्भ में छिपे प्राचीन इतिहास को बचाने के लिए बनाया गया था, वही अब खुद टूटने लगा है. करोड़ों रुपये की लागत से बना बांध ध्वस्त होने के बाद ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

अमरपुर बांका से प्रीतम कुमार की रिपोर्ट

Banka News : बांका जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित भदरिया गांव में चांदन नदी के बीच बने करोड़ों रुपये लागत वाले रिंग बांध के टूटने से इलाके में चिंता बढ़ गई है. तारडीह पुल के समीप कई स्थानों पर रिंग बांध क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे नदी के गर्भ में छिपे संभावित पौरातत्विक अवशेषों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. स्थानीय ग्रामीणों ने अवैध बालू उठाव और विभागीय लापरवाही को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.

छठ पूजा के दौरान मिला था इतिहास का सुराग

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2020 में छठ पूजा के दौरान घाट सफाई के समय चांदन नदी के भीतर मोटी और प्राचीन ईंटों से बनी दीवार दिखाई दी थी. इसके बाद पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गयी कि नदी के गर्भ में किसी प्राचीन सभ्यता के अवशेष दबे हो सकते हैं.यह खबर फैलते ही स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग सक्रिय हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी 12 दिसंबर 2020 को भदरिया गांव पहुंचे थे और स्थल का निरीक्षण किया था.

बौद्धकालीन अवशेष मिलने की जतायी गयी थी संभावना

प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञों और पुरातत्व विभाग की टीम ने यहां करीब 2600 वर्ष पुराने बौद्धकालीन अवशेष होने की संभावना जतायी थी. इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल संसाधन विभाग ने नदी की धारा मोड़ने और स्थल को सुरक्षित रखने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से रिंग बांध का निर्माण कराया था.इसके बाद बिहार विरासत विकास समिति और पुरातत्व विभाग की टीम ने खुदाई कार्य शुरू किया था. खुदाई के दौरान प्राचीन ईंट, मिट्टी के बर्तन के टुकड़े और कई अन्य ऐतिहासिक अवशेष मिलने की बात सामने आयी थी.

अब टूट रहा है रिंग बांध

स्थानीय लोगों का आरोप है कि चांदन नदी से लगातार हो रहे अवैध बालू उठाव और विभागीय उदासीनता के कारण रिंग बांध कमजोर होकर टूटने लगा है. कई जगहों पर बांध क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे पौरातत्विक स्थल के सुरक्षित रहने पर खतरा बढ़ गया है.ग्रामीणों ने बताया कि स्थल पर लगाया गया सूचना बोर्ड भी असामाजिक तत्वों द्वारा उखाड़ दिया गया. धीरे-धीरे खुदाई कार्य बंद हो गया और अब पूरा मामला उपेक्षा का शिकार बन गया है.

ग्रामीणों ने सरकार से लगायी गुहार

भदरिया गांव के लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जिस ऐतिहासिक स्थल से क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी थी, वह अब लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है.ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से रिंग बांध की जल्द मरम्मत कराने, अवैध बालू उठाव पर रोक लगाने और बंद पड़ी खुदाई कार्य को दोबारा शुरू कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो चांदन नदी के गर्भ में छिपा महत्वपूर्ण इतिहास हमेशा के लिए नष्ट हो सकता है.

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Author: AMIT KUMAR SINH

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