कांवर यात्रा में दिखा भक्ति का अनोखा रंग, पिता-पुत्र ने एक जैसे शिव टैटू बनवाकर उठाया कांवर, जानिए पूरी कहानी

Shravani Mela 2026 : श्रावणी मेला 2026 में कांवर यात्रा के दौरान आस्था के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं. पिता-पुत्र की जोड़ी ने एक जैसे शिव टैटू बनवाकर और कंधे पर कांवर लेकर अपनी भक्ति को एक नया आयाम दिया है. यह अनूठी शिवभक्ति श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.

Shravani Mela 2026 : अजगैबीनाथ धाम से बाबाधाम तक जारी कांवर यात्रा में आस्था और भक्ति के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. श्रावणी मेला के दौरान शिवभक्तों में टैटू और रंग-बिरंगी मेहंदी का क्रेज भी दिखाई दे रहा है. कांवरिया हाथ, बांह, पीठ और गर्दन समेत शरीर के विभिन्न हिस्सों पर त्रिशूल, महाकाल, डमरू, नाग और भगवान शिव से जुड़ी आकर्षक आकृतियों के टैटू बनवाकर अपनी भक्ति को एक अलग अंदाज में व्यक्त कर रहे हैं. इसी बीच डाल्टनगंज-पलामू निवासी पिता-पुत्र की जोड़ी अपनी अनोखी शिवभक्ति को लेकर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

एक जैसे टैटू और कंधे पर कांवर, पिता-पुत्र की जोड़ी बनी खास

डाल्टनगंज-पलामू निवासी एनके त्रिपाठी और उनके पुत्र ओम त्रिपाठी ने अपनी कांवर यात्रा को खास बनाने के लिए एक जैसे टैटू बनवाए हैं. दोनों ने बांह पर भगवान शिव से जुड़ी आकृति का टैटू बनवाया और कंधे पर कांवर रखकर बाबाधाम की ओर रवाना हुए.

पिता-पुत्र के एक जैसे टैटू में भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी आस्था साफ दिखाई देती है. कांवरिया पथ पर गुजरते समय यह जोड़ी श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. एक जैसी पहचान और एक जैसा संकल्प पिता-पुत्र के रिश्ते को भी इस यात्रा में खास बना रहा है.

1990 से लगातार बाबाधाम जा रहे एनके त्रिपाठी

शिवभक्त एनके त्रिपाठी ने बताया कि वे वर्ष 1990 से लगातार श्रावणी मेला के दौरान बाबाधाम की यात्रा करते आ रहे हैं. कई वर्षों से जारी उनकी कांवर यात्रा अब उनकी धार्मिक आस्था और जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है.

वर्षों के इस अनुभव के बीच इस बार उनके लिए यात्रा इसलिए भी खास है, क्योंकि उनका पुत्र ओम त्रिपाठी पहली बार कांवर लेकर बाबाधाम की यात्रा कर रहा है.

बेटे की पहली कांवर यात्रा ने बढ़ाई खुशी

ओम त्रिपाठी इस वर्ष पहली बार कांवर उठाकर बाबाधाम की ओर बढ़ रहे हैं. पहली कांवर यात्रा को लेकर उनमें खासा उत्साह है. रास्ते भर वे शिवभक्ति और कांवर यात्रा के अनुभव को महसूस कर रहे हैं.

पिता के वर्षों पुराने कांवर यात्रा के अनुभव और बेटे की पहली यात्रा का यह संगम इस सफर को और भी यादगार बना रहा है. दोनों के कंधे पर कांवर और बांह पर एक जैसे शिव टैटू श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं.

टैटू और मेहंदी से सजा भक्ति का नया अंदाज

श्रावणी मेला में इस बार कांवरियों के बीच शिव से जुड़ी टैटू डिजाइन और रंग-बिरंगी मेहंदी का चलन भी देखने को मिल रहा है. कई शिवभक्त शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर त्रिशूल, डमरू, नाग और महाकाल की आकृतियां बनवा रहे हैं.

भक्ति का यह आधुनिक अंदाज पारंपरिक कांवर यात्रा के साथ एक नया रंग जोड़ रहा है. हालांकि इसके पीछे भाव वही है, जो सदियों से कांवरियों को सुल्तानगंज से बाबाधाम तक खींच लाता है—बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट आस्था.

पिता-पुत्र की यह जोड़ी भी इसी आस्था, पारिवारिक संस्कार और शिवभक्ति की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रही है. एक का अनुभव वर्षों पुराना है तो दूसरे ने इस बार पहली बार उसी परंपरा को अपने कंधे पर कांवर उठाकर आगे बढ़ाया है.


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लेखक के बारे में

By दीपक चौधरी

दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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