बांका में 2 सितंबर तक झमाझम बारिश का अलर्ट, घने बादल छाएंगे, 34 डिग्री तापमान के बीच उमस करेगी परेशान

बांका जिले में मानसून के सक्रिय होने से मौसम का मिजाज फिर बदल गया है. रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच अगले दो दिनों तक घने बादल छाए रहने की संभावना है. हालांकि, 31 डिग्री तापमान के बावजूद उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद कम है.

बांका जिले में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है. मानसून सक्रिय रहने के कारण जिले में रुक-रुककर हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच अगले दो दिनों तक भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने जहां किसानों को राहत दी है, वहीं आम लोगों के लिए उमस भरी गर्मी अभी परेशानी बनी रह सकती है.

दो सितंबर तक बारिश और तेज हवा का दौर

बिहार कृषि विश्वविद्यालय ग्रामीण कृषि मौसम सेवा और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी पूर्वानुमान के अनुसार दो सितंबर तक बांका समेत दक्षिण बिहार के जिलों में आसमान में घने बादल छाए रह सकते हैं. इस दौरान जिले के एक-दो स्थानों पर गर्ज-चमक के साथ तेज हवा चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. पुरवा हवा की रफ्तार 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है.

31 डिग्री तापमान, फिर भी उमस से राहत मुश्किल

सोमवार को बांका में अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. वहीं दो सितंबर तक अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. बारिश के बावजूद हवा में नमी अधिक रहने के कारण लोगों को उमस से खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 85 प्रतिशत और दोपहर में 60 से 70 प्रतिशत के आसपास रह सकती है. सोमवार को सुबह के समय आर्द्रता 90 से 94 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. रात में भी नमी 88 से 92 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है.

किसानों के लिए जरूरी है फसल की निगरानी

मौसम में लगातार बदलाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है. धान की फसल में कम बारिश की स्थिति में खरपतवार तेजी से बढ़ सकता है. ऐसे में किसानों को समय पर निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी गयी है.

खरीफ मक्का में तना बेधक कीट के प्रकोप पर नजर रखने को कहा गया है. प्रभावित पौधों में लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित दवा का प्रयोग करने की सलाह दी गयी है. अरहर की फसल में जरूरत के अनुसार गैप फिलिंग, छंटाई और निराई-गुड़ाई करते रहने को कहा गया है. सितंबर में बोई जाने वाली अरहर के लिए खेत की तैयारी भी समय रहते पूरी करने की सलाह दी गयी है.

बारिश के साथ वज्रपात का भी खतरा

गर्ज-चमक के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों के पास नहीं रहने की सलाह दी है. वज्रपात की स्थिति में लोगों से पक्के मकान या किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लेने की अपील की गयी है. किसानों और ग्रामीणों को भी मौसम साफ होने तक खुले स्थानों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी गयी है.

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लेखक के बारे में

By सुभाष वैद्य

सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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