Barahat School News: जिस विद्यालय को बेहतर शैक्षणिक माहौल और व्यवस्था के लिए इलाके में ‘आदर्श विद्यालय’ के रूप में पहचान मिली, आज उसी के मुख्य गेट की तस्वीर इस पहचान पर सवाल खड़े कर रही है. भेड़ामोड़ स्थित छठु साह आदर्श मध्य विद्यालय के प्रवेश द्वार के पास कचरे का अंबार लगा है. बारिश के बाद कीचड़ और आसपास बेतरतीब तरीके से खड़े वाहनों ने बच्चों की परेशानी और बढ़ा दी है. स्कूल में नामांकित 500 से अधिक छात्र-छात्राएं रोज इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं. रास्ते में पड़े कांच, कांटे और दूसरी नुकीली चीजें बच्चों के लिए चोट का खतरा भी बनी हुई हैं.
बाराहाट. सुबह स्कूल की ओर बढ़ते बच्चों के हाथों में किताबें होती हैं और आंखों में पढ़ाई का सपना. लेकिन भेड़ामोड़ स्थित छठु साह आदर्श मध्य विद्यालय पहुंचने से पहले उन्हें जिस रास्ते से गुजरना पड़ता है, वहां शिक्षा से ज्यादा गंदगी और अव्यवस्था नजर आती है.
विद्यालय के मुख्य गेट के समीप इन दिनों कचरे का ढेर लगा है. बारिश के कारण आसपास की जमीन पर कीचड़ जमा हो जाता है. ऐसे में स्कूल आने वाले बच्चों को इसी गंदे और फिसलन भरे रास्ते से होकर अंदर जाना पड़ता है.
यह स्थिति एक-दो बच्चों की परेशानी नहीं है. विद्यालय में 500 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. यानी हर दिन बड़ी संख्या में बच्चों की आवाजाही इसी प्रवेश द्वार से होती है.
किताबों के साथ बच्चों को उठाना पड़ रहा है चोट का खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, मुख्य गेट के आसपास जमा कचरे में कई बार कांटे, कांच के टुकड़े और अन्य नुकीली वस्तुएं पड़ी रहती हैं. इससे बच्चों के पैरों में चोट लगने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं.
स्कूल जाने वाला रास्ता बच्चों के लिए सुरक्षित होना चाहिए. लेकिन यहां स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है. बारिश में कीचड़, कचरे और फिसलन के कारण छोटे बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है.
अभिभावकों के लिए भी यह चिंता का विषय है. वे बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन रास्ते में ही उनके घायल होने की आशंका बनी रहे तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि विद्यालय के प्रवेश द्वार की सफाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है.
होटल से निकलने वाला कचरा भी बन रहा परेशानी
स्थानीय लोगों ने विद्यालय के मुख्य गेट के आसपास गंदगी बढ़ने की एक वजह स्कूल के समीप संचालित होटल से निकलने वाले कचरे को बताया है.
लोगों का आरोप है कि होटल से निकलने वाला कचरा भी विद्यालय के गेट के आसपास जमा हो जाता है. इसके अलावा होटल में आने वाले ग्राहकों के चारपहिया वाहन भी विद्यालय के प्रवेश द्वार के आसपास अनधिकृत तरीके से खड़े किये जाने की शिकायत है.
वाहनों की आवाजाही और पार्किंग के कारण गेट के आसपास की जमीन पर कीचड़ और अव्यवस्था बढ़ जाती है. बच्चों को ऐसे रास्ते से निकलते समय फिसलने या किसी वाहन की चपेट में आने का खतरा बना रहता है.
‘आदर्श विद्यालय’ के गेट पर ही क्यों दिख रही ऐसी तस्वीर?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस विद्यालय में 500 से अधिक बच्चे रोज पहुंचते हैं, उसके मुख्य प्रवेश द्वार की यह स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची रही.
विद्यालय को ‘आदर्श’ पहचान मिलने का मतलब सिर्फ बेहतर पढ़ाई नहीं है. बच्चों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण भी उतना ही जरूरी है. यदि स्कूल के मुख्य गेट पर ही कचरा, कीचड़ और अनधिकृत पार्किंग हो तो स्वच्छ और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल के दावे पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
यह मामला केवल सफाई का नहीं है. यह बच्चों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है.
अधिकारी बोले- मामला संज्ञान में नहीं था
मामले में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अंकित कुमार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था. उन्होंने कहा कि मुद्दे को सुलझाकर विद्यालय में बच्चों के आवागमन को दुरुस्त कराया जाएगा.
अधिकारी के संज्ञान में मामला आने के बाद अब स्थानीय लोगों और अभिभावकों की नजर कार्रवाई पर है. सवाल यह है कि मुख्य गेट से कचरा कब हटेगा, कीचड़ की समस्या कैसे दूर होगी और वाहनों की बेतरतीब पार्किंग पर रोक कैसे लगेगी.
विद्यालय के प्रवेश द्वार को सुरक्षित बनाने के लिए केवल एक बार सफाई कराना पर्याप्त नहीं होगा. कचरा दोबारा न जमा हो, होटल से निकलने वाले कचरे का उचित निपटारा हो और स्कूल के गेट के पास वाहनों की पार्किंग नियंत्रित रहे, इसके लिए संबंधित स्तर पर लगातार निगरानी जरूरी होगी.
Barahat School News: अब देखना है ‘आदर्श’ विद्यालय की तस्वीर कब बदलेगी
छठु साह आदर्श मध्य विद्यालय के बच्चे फिलहाल हर दिन उसी रास्ते से स्कूल पहुंच रहे हैं. उनके लिए यह कोई खबर या प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की परेशानी है.
बच्चों को गंदगी और कीचड़ से बचाते हुए स्कूल तक सुरक्षित पहुंचाना विद्यालय और संबंधित प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.
अब जबकि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेकर समस्या दूर करने की बात कही है, उम्मीद है कि विद्यालय के मुख्य गेट की बदहाल तस्वीर जल्द बदलेगी. असली सवाल यही है कि ‘आदर्श विद्यालय’ के प्रवेश द्वार से कचरे का यह कलंक कब हटता है और 500 से अधिक बच्चों को कब स्वच्छ और सुरक्षित रास्ता मिल पाता है.
Also Read: “बाप रे! सब कुछ बह गया…”, नेपाल बाढ़ त्रासदी से भटककर मुजफ्फरपुर पहुंची डरी-सहमी महिला
Also Read: बिहार में बढ़ रहा बाढ़ का खतरा, गंगा-गंडक के बाद सोन भी उफनाई, 56 गेट खुले, कई इलाकों में तबाही
