Bhagalpur Railway News: भागलपुर-मंदारहिल रेलखंड पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. इस रूट पर अब ट्रेनें पहले की तुलना में दोगुनी से भी अधिक रफ्तार से दौड़ रही हैं. रेलवे ने इस सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम परिचालन गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी है. इससे भागलपुर, बांका, गोड्डा और दुमका की ओर यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को कम समय में गंतव्य तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्पीड बढ़ाने से पहले ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा का विस्तृत परीक्षण किया गया था. सफल ट्रायल के बाद इस रेलखंड पर तेज रफ्तार से ट्रेनों का नियमित परिचालन शुरू कर दिया गया है.
50 से बढ़कर 110 Kmph हुई ट्रेनों की रफ्तार
अब तक भागलपुर-मंदारहिल रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा थी. लेकिन ट्रैक अपग्रेडेशन और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद रेलवे ने इसे बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया है.
इसका सबसे अधिक लाभ लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को मिलेगा.
स्पीड ट्रायल में 42 मिनट में तय हुई 50 किलोमीटर की दूरी
रेलवे ने नियमित परिचालन शुरू करने से पहले इस रेलखंड पर स्पीड ट्रायल किया था.
ट्रायल के दौरान विशेष ट्रेन ने भागलपुर से मंदारहिल के बीच करीब 50 किलोमीटर की दूरी केवल 42 मिनट में लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरी की थी. परीक्षण में ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित और बेहतर स्थिति में पाया गया, जिसके बाद तेज गति से परिचालन को मंजूरी दी गई.
इन ट्रेनों को मिलेगा फायदा
इस रेलखंड पर वर्तमान में कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें संचालित हो रही हैं. इनमें प्रमुख रूप से गोड्डा-नई दिल्ली हमसफर एक्सप्रेस, गोड्डा-टाटानगर एक्सप्रेस, कविगुरु एक्सप्रेस, रांची-गोड्डा एक्सप्रेस, गोड्डा-राजेंद्रनगर एक्सप्रेस, अगरतला-देवघर एक्सप्रेस और बांका-राजेंद्रनगर इंटरसिटी शामिल हैं.
इसके अलावा भागलपुर-हंसडीहा, भागलपुर-दुमका और भागलपुर-गोड्डा डेमू पैसेंजर ट्रेनों का भी इसी रेलखंड पर संचालन होता है.
जमालपुर-कोलकाता वंदे भारत एक्सप्रेस भी इसी मार्ग से गुजरती है, जिससे इस रेलखंड का महत्व और बढ़ गया है.
सिंगल लाइन बनी चुनौती
हालांकि ट्रेनों की रफ्तार बढ़ गई है, लेकिन इस रेलखंड पर अभी भी सिंगल लाइन होने के कारण कई बार ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है. इससे समयबद्ध परिचालन प्रभावित होता है.
रेलवे का मानना है कि भागलपुर-हंसडीहा-दुमका-बांका रेलखंड के दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की लेटलतीफी काफी हद तक खत्म हो जाएगी और परिचालन अधिक सुचारु होगा.
बढ़ी स्पीड के साथ सुरक्षा भी बड़ी चुनौती
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि तेज रफ्तार से ट्रेनों के संचालन के साथ सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करना जरूरी है.
विशेष रूप से रेलवे ट्रैक पर मवेशियों के आने से दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है. इसलिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और लोगों से रेलवे ट्रैक के आसपास सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है.
रेलवे का मानना है कि बेहतर ट्रैक, तेज गति और भविष्य में डबल लाइन बनने के बाद यह रेलखंड बिहार और झारखंड के बीच रेल संपर्क को और मजबूत करेगा.भियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
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