बांका मंडी में महंगाई की मार, ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से अनाज से सब्जी तक दामों में उछाल

Banka Mandi Price: बांका में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और सप्लाई चेन पर पड़े असर ने मंडी बाजार को अस्थिर कर दिया है. अनाज से लेकर सब्जी तक हर चीज के दाम में बदलाव देखा जा रहा है, जिससे आम लोग परेशान हैं.

मदन कुमार, बांका.
Banka Mandi Price: जिले में ईंधन की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव का असर अब सीधे आम बाजार पर दिखने लगा है. बांका की मंडियों में खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम लगातार अस्थिर बने हुए हैं. व्यापारियों के अनुसार इसकी बड़ी वजह ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई रूट में बदलाव है. खासकर भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद माल ढुलाई का रास्ता लंबा हो गया है, जिससे लागत और बढ़ गयी है.

ट्रांसपोर्ट रूट बदलने से बढ़ा बोझ

व्यापारियों का कहना है कि पहले जहां पूर्णिया से बांका की दूरी करीब 100 किलोमीटर थी, वहीं अब कृष्णा सेतु होकर यह दूरी लगभग 250 किलोमीटर हो गयी है. इस बदलाव ने ट्रांसपोर्ट खर्च को दोगुना से अधिक कर दिया है. ऊपर से लगातार बढ़ते ईंधन दाम ने व्यापारियों और किसानों दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है.

मंडी में दिखा महंगाई का असर

बांका मंडी में आटा, चना, अरहर और मसालों के दाम में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. वहीं आलू और प्याज के भाव में आवक के अनुसार उतार-चढ़ाव जारी है. व्यापारियों के मुताबिक बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और खरीदारों की खरीद क्षमता पर भी असर पड़ रहा है.

अनाज और दाल बाजार में तेजी का रुख

गेहूं 2600 से 2650 रुपये प्रति क्विंटल, मक्का 2100 से 2150 रुपये प्रति क्विंटल और मंसूरी चावल 3250 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है. बासमती चावल के दाम 12500 से 13500 रुपये तक पहुंच गए हैं. दलहन बाजार में मसूर 5550 से 6750 रुपये, अरहर 11000 से 14500 रुपये और मूंग दाल 9540 से 9600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज की गयी.

सरसों और सब्जियों में मिला-जुला असर

सरसों तेल और पीला सरसों के दाम स्थिर से हल्के बढ़े हुए हैं. आलू 1200 से 1450 रुपये और प्याज 1800 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है. व्यापारियों का कहना है कि आवक और ट्रांसपोर्ट लागत के कारण कीमतों में रोजाना बदलाव देखने को मिल रहा है.

आम जनता पर बढ़ता बोझ

स्थानीय बाजारों में खुदरा कीमतों में भी असर साफ दिख रहा है. फल, सब्जी, तेल और अनाज सभी महंगे हो रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईंधन और लॉजिस्टिक लागत में राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में स्थिरता मुश्किल है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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