Banka News: बांका जिले के कटोरिया प्रखंड अंतर्गत चांदन क्षेत्र के बाबू महल नारायणडीह स्थित मथुरा मोड़ में रविवार को विश्व आदिवासी मिलन दिवस के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. भीम नसार क्लब आदिवासी कल्याणकारी सामाजिक संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बेलहर विधायक मनोज यादव शामिल हुए. उनके आगमन पर आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ जोरदार स्वागत किया.
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और लोक जीवन की रंगारंग झलक देखने को मिली. पूरे आयोजन में उत्साह, सांस्कृतिक गौरव और सामुदायिक एकजुटता का वातावरण बना रहा.
पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने मोहा मन
मथुरा मोड़ में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से पहुंचे आदिवासी समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत किए.
ढोल-मांदर की थाप पर हुए सांस्कृतिक प्रदर्शन ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया. विधायक मनोज यादव का भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया.
विधायक ने कहा, आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेलहर विधायक मनोज यादव ने कहा कि आदिवासी समाज देश के विकास और सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि यह समाज अपनी ईमानदारी, मेहनत, प्रकृति से जुड़ाव और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है.
सड़क, शिक्षा और विकास कार्यों का दिलाया भरोसा
विधायक ने कहा कि बिहार सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने सड़क, शिक्षा, आधारभूत संरचना और अन्य विकास योजनाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की बात कही.
उन्होंने यह भी कहा कि बेलहर विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा.
Banka News: बड़ी संख्या में जुटे समाज के लोग
कार्यक्रम में संयोजक अनिल सोरेन, जय किशोर सोरेन, चुनकु लाल मुर्मू, सदानंद मुर्मू, बाबूराम सोरेन, पृथ्वी चंद मुर्मू, शिवलाल मुर्मू, शशिकांत सोरेन, गणेश सोरेन, मुनि लाल हंसदा और सूरज हंसदा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.
आयोजकों ने बताया कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, भाषा, परंपरा और सामाजिक एकता को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है.
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