बांका जिला को बनाना है फाइलेरिया मुक्त : सीएस

बांका जिला को बनाना है फाइलेरिया मुक्त : सीएस

आज से 21,44,877 लाभार्थियों को खिलायी जायेगी फाइलेरिया रोधी की दवा 11 फरवरी को मनाया जायेगा एमडीए मेगा अभियान बांका. फाइलेरिया रोग के उन्मूलन को लेकर जिले में आज से एमडीए अभियान शुरू होने वाली है. इसको लेकर सीएस जितेंद्र कुमार सिंह ने सोमवार को अपने कार्यालय वेश्म में प्रेसवार्ता की. सीएस ने कहा कि सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के तहत आज से सभी लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलायी जायेगी. वहीं 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जायेगा. जिसमें बूथ लगा कर समुदाय के सभी लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा सेवन कराएंगे. इसके अलावा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर योग्य लाभार्थियों को दवा का सेवन करायेंगे. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं. रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी है. सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं. और अगर किसी को दवा खाने के बाद मितली व चक्कर जैसे लक्षण होते हैं तो यह शुभ संकेत है. इसका मतलब है कि हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं. जोकि दवा खाने के बाद मर रहें हैं. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान यदि किसी लाभार्थी को दवा सेवन के पश्चात किसी प्रकार की कोई कठिनाई प्रतीत होती है. तो उससे निपटने के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डा. बिजय कुमार ने बताया कि जिले कुल 21 लाख 44 हजार 877 लाभार्थियों को कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के द्वारा घर-घर जाकर अपने सामने खिलाई जायेगी. इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है. 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं खिलाई जायेगी. फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं. वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी मो. आरिफ इकबाल ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है. यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फाइलेरिया, दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है. यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है. और अगर इससे बचाव न किया जाये तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है. फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे: हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों में सूजन) और दूधिया सफेद पेशाब (काईलूरिया) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है. जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. विशेषज्ञ के अनुसार अगर व्यक्ति लगातार 5 साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खा लेता है. तो पूरे जीवन उसे फाइलेरिया रोग होने की संभावना समाप्त हो जाती है. इस मौके पर वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी सोनाली कुमारी, रोहित कुमार, मीडिया सहयोगी के साथ सीफार से खुशबू सिंह, जय प्रकाश कुमार, पिरामल स्वास्थ्य के जिला स्तरीय प्रतिनिधि और जिला स्वास्थ्य समिति बांका के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे.

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By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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