यहां 70 सालों से बिकता थी शराब

प्रोत्साहन. कल जहां छलकता था ‘जाम’ वहां खुला डेयरी फार्म कटोरिया : शराबबंदी से पहले तक जहां शराब का जाम छलकता था, अब वहां डेयरी-फार्म खुल चुका है. कटोरिया बाजार का जो परिवार पिछले सत्तर सालों से लाइसेंसी शराब के कारोबार से जुड़ा था, उसने अब दुग्ध उत्पादन का कारोबार शुरू कर पूर्ण शराबंदी का […]

प्रोत्साहन. कल जहां छलकता था ‘जाम’ वहां खुला डेयरी फार्म

कटोरिया : शराबबंदी से पहले तक जहां शराब का जाम छलकता था, अब वहां डेयरी-फार्म खुल चुका है. कटोरिया बाजार का जो परिवार पिछले सत्तर सालों से लाइसेंसी शराब के कारोबार से जुड़ा था, उसने अब दुग्ध उत्पादन का कारोबार शुरू कर पूर्ण शराबंदी का समर्थन भी किया है. समग्र गव्य विकास योजना के तहत इन्हें पचास प्रतिशत अनुदानित मूल्य पर दुधारू पशु भी उपलब्ध कराये गये हैं. जिला गव्य विकास पदाधिकारी नंद कुमार सिंह ने अतुलेश भगत उर्फ मुन्ना भगत के डेयरी फार्म का निरीक्षण भी किया. इस क्रम में उनके साथ इंश्योरेंस अधिकारी व पशु चिकित्सक डा शैलेश कुमार सिंह भी मौजूद थे.
प्राप्त जानकारी के अनुसार कटोरिया निवासी रामनगद भगत ने करीब सत्तर साल पहले सर्वप्रथम शराब का लाइसेंसी दुकान खोला. इसके बाद इनके पुत्र स्व सीताराम साह, फिर पुत्रवधु धर्मशीला भगत, पौत्र राजाराम भगत, अतुलेश भगत व अमितेश भगत के नाम से भी बारी-बारी से लाइसेंसी शराब की दुकान चलती रही. अर्पित बियर बार भी खुली. लेकिन गत एक अप्रैल 2016 से राज्य में लागू शराबबंदी के बाद से इनका शराब का कारोबार बंद हो गया. इसके बाद इस परिवार ने शराब की जगह दुध का करोबार शुरू किया. समग्र गव्य विकास योजना 2015-16 के तहत अतुलेश भगत उर्फ मुन्ना भगत ने स्वलागत पर मुर्रा नस्ल की पांच भैंस खरीद कर डेयरी फार्म की स्थापना की.
समग्र गव्य विकास योजना से मिला सहयोग
कल से जमा लिये जायेंगे फार्म
समग्र गव्य विकास योजना के तहत दो, पांच, दस व बीस दुधारू मवेशी खरीद का डेयरी फार्म खोला जा सकता है. इसके लिए इच्छुक आवेदक 16 नवंबर से 15 दिसंबर तक जिला कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं. जिला गव्य विकास पदाधिकारी नंद कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना में सामान्य कोटि के लोगों को पचास प्रतिशत एवं अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को पचहत्तर प्रतिशत तक का अनुदान विभाग द्वारा प्रदान की जाती है. दस एवं बीस मवेशी के यूनिट की स्थापना में सभी वर्गों को पचास प्रतिशत का ही अनुदान मिलेगा.

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