शंभुगंज. यज्ञ मंडप परिक्रमा करने वाले जीवों को सुख, शांति, दीघार्यु, आरोग्यता की प्राप्ति होती है. साथ ही काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईष्या का क्षय होता हैं. उक्त बातें कामतपुर गांव में चल रहे 11 दिवसीय महारुद्र यज्ञ में यज्ञाचार्य मृत्युंजय झा ने कही. उन्होंने बताया कि यज्ञ हवन त्रेता, द्वापर, सतयुग से होते आ रहा हैं. बताया कि जो मनुष्य सच्चे मन से यज्ञ मंडप की 108 बार परिक्रमा करते हैं. उस जीव के अंदर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं. सोमवार को यज्ञ में परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़े. सुबह से मौसम अनुकूल होने के कारण श्रद्धालुओं का दिनभर यज्ञ परिसर में भीड़ लगी रही. यज्ञ मंडप के चारो तरफ ऊं नमः शिवाय के मंत्र गुंजायमान रहे. शाम में बाहर से आए कलाकारों द्वारा रात्रि जागरण का आयोजन किया गया. आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यज्ञ की पूर्णाहुति 29 अप्रैल को होगा.
यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने से साकारात्मक ऊर्जा का होता है संचार
उक्त बातें कामतपुर गांव में चल रहे 11 दिवसीय महारुद्र यज्ञ में यज्ञाचार्य मृत्युंजय झा ने कही
