मुसीबत. इस बार नौ प्रतिशत कम हुई है बारिश, भगवान की आस में बैठा है िवभाग
प्राय: यह देखा गया है कि सावन माह के अंत तक किसान अपने अपने खेतों में रोपा का कार्य पूर्ण कर लेते हैं, लेकिन बांका के किसान भादो माह के आरंभ होने के बाद भी अब तक रोपा का कार्य पूर्ण नहीं कर सके हैं. इसका मुख्य कारण वर्षा के अनुपात में कमी है. अन्य वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष वर्षानुपात में कमी हुई है. इससे जिले का बड़ा भू-भाग परती रह गया है. यदि 15 दिनों के अंदर पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो किसान रोपा का कार्य नहीं कर पायेंगे और उन्हें सालों भर अन्न के लाले पड़े रहेंगे.
बांका :वर्तमान में सिंह नक्षत्र चल रहा है. इस नक्षत्र के बारे में कहा जाता है कि इसमें एकाएक अच्छी बारिश होती है. इससे छूटे हुए किसानों का रोपा कार्य पूर्ण हो जाता है. जिला कृषि कार्यालय से मिले आकड़ों के अनुसार इस वर्ष के तीनों माह को मिलाकर नौ प्रतिशत वर्षा कम हुई है.
ऐसे में किसानों के बीच सबसे बड़ी समस्या सिंचाई को लेकर है. सिंचाई के लिए कई किसान एक ही कुएं का उपयोग कर रहे हैं. वहीं कई किसान इसलिए भी बेचैन हैं कि उनके खेत की सिंचाई अगर नहीं हुई तो उनके खेतों में लगी फसल कहीं बरबाद न हो जाये. कृषि कार्यालय के अनुसार सबसे अधिक वर्षा जुलाई में होनी चाहिए, लेकिन इस वर्ष नौ प्रतिशत तक कम वर्षा हुई है. ऐसे में जिले के प्रखंडों के बड़े भू-भाग में अब तक रोपनी आरंभ नहीं हुई है. कृषि विभाग के आकड़ों के अनुसार वर्षा के अभाव में अब तक 17.68 प्रतिशत भू-भागों में रोपनी नहीं हुई है. ऐसे में किसानों के सामने बड़ी समस्या उत्पन्न हो जा रही है. किसान वर्षा को लेकर लगातार पूजा-पाठ से लेकर हवन आदि कर रहे हैं. पूरे जिले का 98000 हेक्टेयर भूमि धान की रोपनी योग्य है. इसमें 80670 हेक्टेयर में ही रोपा हुआ है. पूरे जिले में चांदन और बाराहाट प्रखंड में जहां 100 प्रतिशत खेती हुई है. वहीं सबसे कम खेती फुल्लीडुमर प्रखंड में हुई है.
किसानों की नजर डीजल अनुदान पर टिकी : अभी तक 18 प्रतिशत भू-खंडों में खेती नहीं हो पायी है, तो ऐसे में किसानों की नजर सरकार द्वारा दिये जाने वाले डीजल अनुदान पर टिकी हुई है. राज्य सरकार ने बांका में धान की रोपनी एवं अच्छी खेती के लिए जिले को 2 करोड़ 35 लाख 7 हजार 400 रुपये डीजल अनुदान के लिए स्वीकृत किये है. किसानों तक डीजल अनुदान समय पर पहुंचे, इसके लिए विभाग अपनी ओर से प्रयास आरंभ कर दिया है. प्रखंडों में डीजल अनुदान की राशि जिला कृषि कार्यालय से भेज दी गयी है. अब किसानों को अनुदान पहुंचाने की जिम्मेवारी प्रखंड के अधिकारियों पर आ गयी है. देखने वाली बात यह है कि यह राशि कब तक किसानों को मिलती है. अभी तक पूरे जिले की बात करें तो मात्र पांच प्रखंडों के द्वारा ही राशि की निकासी की गयी है. जो मात्र 15 प्रतिशत है. ऐसे में किसानों तक कैसे डीजल अनुदान समय पर पहुंचेगा.
अब भी 18% भूभागों में नहीं हो पायी धान की रोपनी
सूख गये धान के खेत, जल गयी फसल.
कृषि विभाग के आकड़ों के अनुसार वर्षा के अभाव में अब तक 17. 68 प्रतिशत भू-भागों में रोपनी नहीं हुई है.
बारिश नहीं होने से किसानों के सामने बड़ी समस्या उत्पन्न होती जा रही है
प्रखंड लक्ष्य आच्छादन प्रतिशत
अमरपुर 10112 8090 80
बांका 8457 8034 95
बाराहाट 7907 7907 100
बेलहर 9561 6693 70
बौंसी 8458 7020 83
चांदन 9009 9009 100
धोरैया 10663 9064 85
फुल्लीडुमर 5701 2965 52
कटोरिया 8457 7611 90
रजौन 9562 6693 70
शंभूगंज 10113 7585 75
कुल 98000 80670 82.32
कहते हैं अिधकारी
सिंह नक्षत्र में अच्छी वर्षा होती है. ऐसे में अभी उम्मीद है कि पूरे जिले में शत प्रतिशत धान की रोपनी हो जायेगी. फिर भी विभाग किसानों तक डीजल अनुदान की राशि पहुंचाने के लिए तत्पर है. प्रखंडों को डीजल अनुदान की राशि भेजी जा चुकी है. किसान डीजल अनुदान का आवेदन प्रखंडों में जमा कराकर इसका लाभ उठा सकते है.
सुदामा महतो, जिला कृषि पदाधिकारी, बांका
