बांका : विश्व का सबसे लंबा चलने वाला श्रावणी मेला कल से आरंभ होने जा रहे हैं. ऐसे में अब तक ना तो पीएचइडी, ना ही स्वास्थ्य विभाग, ना ही भवन निर्माण विभाग और ना ही बिजली विभाग ही अपना काम पूरा किया है. अब बंगाली सावन आरंभ हो चुका है और बंगाल के कांवरिया चलना आरंभ कर दिये हैं और उनको वो सारी सुविधाएं नहीं मिल रही है तो जिला प्रशासन की तैयारियों पर सबाल उठना लाजमी है.
सुलतानगंज से बाबाधाम तक पूरे एक महीने चींटी की धार के समान चलने वाले कांवरिया के लिए ना तो अच्छी सड़क ही बना सकी है और ना ही बिजली के समुचित इंतजाम हुए है. इनारावरण सरकारी धर्मशाला को छोड़ कोई भी सरकारी धर्मशाला अब तक तैयार नहीं हो पाया है.
स्वास्थ्य विभाग की भी अधूरी है तैयारी : घायल कांवरियों का समुचित उपचार हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पर्याप्त मात्रा में अस्थायी स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया है. जिसमें हर वक्त चिकित्सक उपलब्ध हो.
इस वर्ष प्रत्येक दस किलोमीटर पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गयी है और साथ ही जरूरी दवाओं की समुचित व्यवस्था की गयी है. स्वास्थ्य विभाग इस वर्ष कई खाद्य निरीक्षक को लगाया है ताकि कांवरियों को शुद्ध भोजन मिल सके.
पेयजल को तरसेंगे कांवरिया: कांवरिया पथ के ज्यादातर सरकारी चापाकलों को रंग-रोगन कर कांवरियों के लिए पेयजल बंदोबस्त कर दिये जाने का दिखावा पीएचइडी विभाग द्वारा किया गया है. लेकिन सच यह है कि ज्यादातर भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर चापाकल ही नहीं लगे या जहां लगे हैं वे पानी नहीं उगल रहे. नये चापाकल लगाने में भी इस बार पीएचइडी ने अपेक्षित दिलचस्पी अब तक नहीं दिखायी है.
कई स्थानों पर नहीं पहुंची है बिजली
मेले में रात भी दिन सा दिखे और कांवरिया आसानी से अपनी दूरी तय करें, इसके लिए जिलाधिकारी ने बिजली विभाग को यह भार सौंपा था. बिजली विभाग कांवरिया मार्ग में चौबीसो घंटा बिजली उपलब्ध रहे इसके लिए लगातार प्रयास कर रहा है. लेकिन इस काम को धरातल पर उतारने की मानसिकता शायद विभाग के पास नहीं है.
