बांका जिप चुनाव. मत विभाजन के आधार पर उपाध्यक्ष चुनी गयीं अर्चना सिंह
इस बार बांका में जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव खास रहा. सुनील कुमार सिंह ऐतिहासिक रूप से निर्विरोध निर्वाचित हुए. वहीं जिप उपाध्यक्ष के पद पर अर्चना सिंह दो मतों से विजयी हुईं. अर्चना भागलपुर-बांका सेंट्रल को-अॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार िसंह की पत्नी हैं.
बांका : बिल्कुल शांतिपूर्ण माहौल में गुरुवार को यहां हुए जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में सुनील कुमार सिंह अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुन लिये गये. वे बेलहर पूर्वी क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य हैं. अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ एक नामांकन होने की वजह से जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी डॉ निलेश देवरे ने उन्हें अध्यक्ष पद पर निर्वाचित घोषित किया. जानकारी के अनुसार, चुनाव होने की स्थिति में जिला परिषद के 19 सदस्य उनके समर्थन में थे.
इधर उपाध्यक्ष पद के लिए अर्चना सिंह को निर्वाचित घोषित किया गया. वे भागलपुर-बांका सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार सिंह की पत्नी है. इस पद के लिए दो प्रत्याशी अर्चना सिंह एवं विजय किशोर सिंह आमने-सामने थे. दो प्रत्याशी होने की वजह से जिला परिषद उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मत विभाजन कराया गया. अर्चना सिंह को 13 जबकि विजय किशोर सिंह को 11 जिला परिषद सदस्यों का समर्थन हासिल हुआ.
बांका जिले में जिला परिषद के कुल 25 सदस्य है. 24 सदस्य गुरुवार को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव के दौरान उपस्थित थे. एक सदस्य सिंपल देवी अनुपस्थित रहीं. वे पूर्व में जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं. जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने अर्चना सिंह को दो मतों से निर्वाचित घोषित किया. ज्ञात हो कि इससे पहले के कार्यकाल में इस पद पर अर्चना सिंह की ही जेठानी नीलम सिंह रहीं. जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव समाहरणालय स्थित सभागार में हुआ. चुनाव प्रक्रिया सवेरे 11 बजे से आरंभ होनी थी. लेकिन इसमें कुछ देर के लिए विलंब हुआ. 11 बजे तक बांकी 24 सदस्य उपस्थित हो चुके थे. एक सदस्य सिंपल देवी अनुपस्थित थीं. चुनाव प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व कुछ देर तक उनके आने की प्रतीक्षा की गयी. लेकिन उनके नहीं आने की बात सुनिश्चित हो जाने पर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. करीब एक घंटे के अंदर दोनों पदों के लिए चुनाव संपन्न हो गया. जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद के चुनाव को देखते हुए समाहरणालय परिसर सहित आस-पास के क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी. समाहरणालय के अंदर सभी को प्रवेश की अनुमति नहीं थी. सभागार में भी सदस्यों को मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ा. समाहरणालय के सामने सड़क के उत्तर ब्लॉक गेट एवं दक्षिण कृषि कार्यालय के समीप बेरियर लगा कर लोगों एवं वाहनों को रोक दिया गया था.
