महुआ फूल व कोड़ के भरोसे क्षेत्र के गरीबों का छह माह भरता है पेट
जयपुर : गरीबी, अशिक्षा और भूख की मार झेलते जयपुर क्षेत्र के लोगों की जीविका कटहल व महुआ के फूलों पर आधारित है. क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग महुआ के भरोसे अपनी जीविका चलाते है. इस क्षेत्र के जंगलों में बड़े पैमाने पर महुआ के पेड़ है.
फागुन आते ही इन पेड़ों पर उगने वाले लाल कोपलों की तरह क्षेत्र के गरीब गुरबों के चेहरे भी खिल जाते हैं. उनकी रोजी रोटी का दाता सामने होता है. महुआ में इसी दौरान फूल खिलते हैं. जिनकी सुरभि के साथ टपकने की प्रक्रिया इस क्षेत्र के गरीबों के लिए भोजन के बंदोबस्त की मानिंद होती है. क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं, पुरुष व बच्चे इन दिनों महुआ के पेड़ों से टपकने वाले इसके फूलों को चुनने में लगे हैं. सुबह इन फूलों को चुनने के लिए जंगल में भीड़ लग जाती है.
इन कोड़ों से निकलने वाला तेल खाने से लेकर दिये जलाने तक में प्रयुक्त होता है. यह तेल बाजारों में सौ से डेढ़ सौ रुपये किलो तक बिकता है. क्षेत्र के लोग महुआ की कोड़ से निकलने वाले तेल की बदौलत भोजन का भी इंतजाम कर पाते हैं. है.
