नक्सलियों की रहस्यमय चुप्पी से बड़े खतरे की आशंका
बांका : भाकपा माओवादी की पूर्वी क्षेत्र जोनल कमेटी के कमांडर रामचंद्र महतो उर्फ जोधन उर्फ चिराग दा की मौत के बाद संगठन की रहस्यमय चुप्पी कहीं किसी आसन्न नक्सली तूफान की पृष्ठभूमि तो नहीं ? खुफिया सूत्र तो कुछ ऐसा ही मानते हैं. पिछले डेढ़ दशक के अनुभवों के आधार पर खुफिया विभाग के […]
बांका : भाकपा माओवादी की पूर्वी क्षेत्र जोनल कमेटी के कमांडर रामचंद्र महतो उर्फ जोधन उर्फ चिराग दा की मौत के बाद संगठन की रहस्यमय चुप्पी कहीं किसी आसन्न नक्सली तूफान की पृष्ठभूमि तो नहीं ? खुफिया सूत्र तो कुछ ऐसा ही मानते हैं. पिछले डेढ़ दशक के अनुभवों के आधार पर खुफिया विभाग के सूत्र इस बात की पुष्टि करते है कि निकट भविष्य में नक्सली संगठन पूर्व बिहार में कहीं किसी बड़ी हिंसक और विध्वंसक कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं.
इस बाबत खुफिया एजेंसियों ने जिला एवं राज्य पुलिस प्रशासन को आगाह करते हुए अपनी आशंकाएं जाहिर कर दी हैं. लिहाजा पुलिस प्रशासन ने भी किसी आसन्न अनहोनी की आशंकाओं के मद्देनजर अपनी तैयारियां पूर्ण कर रखी है.
आमतौर पर नक्सली अपने सामान्य मिलिसिया की गिरफ्तारी तक पर बंद का आ\"ान करते हैं. किसी नेता की मुठभेड़ या हिरासत में हुई मौत पर तो वे जैसे सिर पर आसमान उठा लेते थे, लेकिन जोनल कमांडर चिराग दा की मुठभेड़ में हुई मौत के चार दिन बाद भी उनकी चुप्पी पुलिस प्रशासन के साथ रहस्यमय और अतिरिक्त चेतावनी सरीखा साबित हो रहा है. हालांकि पुलिस का दावा है कि बांका सहित जमुई, मुंगेर, लखीसराय एवं झारखंड के देवघर जिले की पुलिस आपस में समन्वय स्थापित कर नक्सलियों की एक – एक गतिविधि पर नजर रखी हुई है.
एसपी सत्यप्रकाश ने कहा कि बांका जिले में नक्सलियों की किसी भी कार्रवाई से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार हैं. नक्सल प्रभावित सीमावर्ती जंगलों में लगातार सर्च अभियान जारी है. अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती इस क्षेत्र में की गयी है. जिले के अन्य हिस्सों में भी पुलिस और खुफिया एजेंसियां नक्सली गतिविधियों को लेकर सजग, सतर्क एवं तैयार हैं.