बौंसी : बौंसी रेफरल अस्पताल में मूक-बधिर युवती का बंध्याकरण का आपरेशन कर दिया गया था. उसकी न शादी हुई ही नहीं और ना ही बच्चे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि वह बचपन से ही मूक-बधिर है, इस वजह से उसकी शादी नहीं हो पायी. उसके परिजन भी काफी गरीब हैं. बौंसी थानाक्षेत्र के एक गांव में छोटे से घर में अपने मां-बाप के साथ रह रही है. उसके दो अन्य भाई गांव में ही अलग घर बना कर रह रहे हैं. ताज्जुब यह है कि इस नि:शक्त युवती को अब तक सरकार दिये जाने वाले पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है. बूढे मां-बाप ही उसका सहारा हैं. पिता शारीरिक रूप से कमजोर हैं. खेती-बारी में अक्षम हैं.
किसी ने भी नहीं ली मूक बधिर लड़की की सुधि
बौंसी : बौंसी रेफरल अस्पताल में मूक-बधिर युवती का बंध्याकरण का आपरेशन कर दिया गया था. उसकी न शादी हुई ही नहीं और ना ही बच्चे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि वह बचपन से ही मूक-बधिर है, इस वजह से उसकी शादी नहीं हो पायी. उसके परिजन भी काफी गरीब हैं. बौंसी थानाक्षेत्र के एक […]

अब तक नहीं मिला योजना का लाभ : लड़की की मां ने बताया कि आज तक सरकार के कर्मी अथवा किसी भी जनप्रतिनिधि ने उसकी सुधि नहीं ली. वृद्धावस्थापेंशन भी इस दंपती को नहीं मिल रहा. गरीबी और तंगहाली से तंग मां-बाप ने अपनी मूक-बधिर और लाचार बेटी का बंध्याकरण करवा दिया. पुत्री की शादी करने के लिए उनके पास पर्याप्त धन नहीं था.
पति के नाम का आदमी ही नहीं है गांव में: अस्पताल प्रबंधन ने भी इस मामले में अनदेखी की. उसका बंध्याकरण कर दिया. बीएसटी के लिए पूछताछ नहीं की. जबकि नियमत: बड़े अॉपरेशन में पति की सहमति आवश्यक है. बीएसटी में पति और बच्चे का जिक्र अस्पताल प्रबंधन ने अपनी खामी छुपाने के लिए किया है. शुक्रवार को रेफरल प्रभारी ने बताया था कि युवती शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं. लेकिन शनिवार को बारापघार गांव से पता चला कि इस नाम का कोई व्यक्ति उक्त गांव में है ही नहीं. अस्पताल प्रबंधन इस मामले में चुप्पी साधे है.
कहते हैं सीएस : हालांकि सीएस सुधीर कुमार महतो ने बताया कि उक्त मामले में संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. मामले की जांच की जा रही है. सोमवार को जांच के बाद ही मामले का खुलासा हो पायेगा.