राष्ट्रीय हरित आयोग ने लगायी है चांदन नदी से बालू उत्खनन पर रोक
राज्य खनन सचिवालय से मांगे गये हैं दिशा निर्देश : जिला प्रशासन
बांका : राष्ट्रीय हरित आयोग (एनजीटी) द्वारा बांका जिले में चांदन नदी से हो रहे बालू के उत्खनन पर रोक लगा दिये जाने के आदेश के बाद इस संबंध में की गयी विभागीय एवं प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि रविवार को समाप्त हो गयी. हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई हेतु आयोग के आदेशों से खनन विभाग को अवगत करा दिया गया है. विभागीय सचिवालय से इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश की मांग की गयी है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सकें.
उल्लेख्य है कि एक परिवार पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित आयोग ने बांका जिले में चांदन नदी से हो रहे बालू के उत्खनन को पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक करार देते हुए इस पर रोक लगाने का आदेश राज्य खनन विभाग एवं जिला प्रशासन को दिया था. इस संबंध में इन विभागों द्वारा की गयी कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट आयोग को समर्पित करने के लिए 31 जनवरी की तारीख निर्धारित की गयी थी.
आयोग के आदेश के हवाले से जिलाधिकारी बांका के ओएसडी ब्रजेश कुमार ने जानकारी दी कि आदेश में कहा गया हैं कि जब तक पर्यावरण संबंधी विभागीय अनापत्ति नहीं मिल जाता तब तक चांदन नदी से किसी भी तरह के बालू उत्खनन पर चलान और परमिट नहीं दिया जाना है. यह आदेश खनन विभाग के लिए है जिसकी सूचना संबंधित परिवाद के वकील द्वारा बांका जिला प्रशासन को भी दी गयी.
इस सूचना पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने राज्य उत्खनन विभाग के सचिव को पत्र लिख कर तत्संबंधी कार्रवाई के लिए आवश्यक दिशा निर्देश मांगा हैं. इस संबंध में अब तक कोई दिशा निर्देश सचिवालय से प्राप्त नहीं है.
इस बीच एनजीटी के आदेश के बाद भी बांका जिले में चांदन नदी से होने वाले बालू का उत्खनन जारी है. खास कर बांका से लगायत सिंहनान घाट तक चांदन नदी के विभिनन घाटों से रात और दिन युद्ध स्तर पर बालू का उत्खनन चल रहा है. बालू के उठाव में जेसीबी और पोकलेन जैसे यंत्र लगाये गये हैं. नदी घाटों पर दिन भर सैकड़ों ट्रकों और हायवा की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. यह सब प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है. हालांकि पूछने पर प्रशासन के अधिकारी इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर करते हैं.
