शहीदों के स्मारक पर मेला सिर्फ एक दिन क्यों ?

बांका : संपूर्ण भारतवर्ष गणतंत्र दिवस समारोहों की तैयारियों में जुटा है. बांका जिले में भी इस बावत हर स्तर पर तैयारियां की जा रही है. लेकिन पता नहीं क्यों उन महापुरुषों की अब तक कोई खोज खबर नहीं ली गयी जिनके त्याग और बलिदान की वजह से आज हम स्वतंत्र है और एक संप्रभुत्व […]

बांका : संपूर्ण भारतवर्ष गणतंत्र दिवस समारोहों की तैयारियों में जुटा है. बांका जिले में भी इस बावत हर स्तर पर तैयारियां की जा रही है. लेकिन पता नहीं क्यों उन महापुरुषों की अब तक कोई खोज खबर नहीं ली गयी जिनके त्याग और बलिदान की वजह से आज हम स्वतंत्र है और एक संप्रभुत्व गणतंत्र के नागरिक भी. 25 जनवरी को शहीद सतीश की जयंती है. शहीद सतीश की जन्म भूमि इसी जिले का खड़हारा गांव है. जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर बाराहाट प्रखंड के खड़हारा गांव के पंडित जगदीश चंद्र झा के पुत्र सतीश का जन्म गांव में ही हुआ था.

ये वही सतीश झा हैं जिन्होंने 11 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के आह्वान पर पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के जुनन में अपने अन्य 6 साथियों के साथ हंसते – हंसते अपने प्राणोत्सर्ग कर दिये थे. उन्होंने अंतत: सचिवालय पर तिरंगा फहरा ही दिया. इन सात शहीदों का स्मारक पटना सचिवालय के समक्ष आज भी है. लेकिन दुर्भाग्य है कि अपनी ही जन्मभूमि बांका जिले में एकमात्र ढाकामोड़ चौक पर छोटी प्रतिमा के अलावा जिले में कहीं और कोई स्मारक उनका नहीं है. ढाकामोड़ में भी प्रशासन राष्ट्रीय त्योहारों पर उन्हें माल्यार्पण कर आता है,

लेकिन इसके बाद स्मारक किस हाल में है. कोई देखने वाला नहीं है. इसी तरह बांका शहर के जिला परिषद मार्केट स्थित शहीद भगत सिंह स्मारक पर रोज सब्जी बाजार लगता है, लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है. शहर के गांधी स्मारक, अांबेडकर स्मारक, शास्त्री स्मारक आदि भी बदहाल हैं. कल गणतंत्र दिवस समारोह हैं लेकिन इन स्मारकों की अब तक साफ – सफाई एवं इनका रंग रोगन तक नहीं किया गया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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