जनप्रतिनिधि मकसद के मारे हैं. जहां पब्लिक का भीड़ हो जहां पुल न हो पुल बनाने की वकालत जरूर कर लेते हैं. बहरहाल स्टैंड कीचड़मय हो जाने से यात्रियों को बस पर सवार होने में परेशानी होती है. उनके कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं, तो कभी फिसल कर गिर भी जाते हैं. आम जन इसे भुगतने को विवश रहते हैं आखिर क्यों सरकार को बस पड़ाव का टैक्स जाता है. एक सवाल तो आम लोगों में बनती ही होगी.
कीचड़मय हुआ बस पड़ाव
बांका: मौसम ने थोड़ा सा मिजाज बदला, हल्की सी बारिश हुई और बांका बस स्टैंड कीचड़मय हो गया. मालूम हो हाल के दिनों में राज्य सरकार के परिवहन मंत्री रमई राम जब बांका पहुंचे थे, तो उन्होंने स्टैंड को हाइटेक करने की बात कही थी. लेकिन मंत्री जी की घोषणा समाचार पत्रों की खबर बन […]

बांका: मौसम ने थोड़ा सा मिजाज बदला, हल्की सी बारिश हुई और बांका बस स्टैंड कीचड़मय हो गया. मालूम हो हाल के दिनों में राज्य सरकार के परिवहन मंत्री रमई राम जब बांका पहुंचे थे, तो उन्होंने स्टैंड को हाइटेक करने की बात कही थी. लेकिन मंत्री जी की घोषणा समाचार पत्रों की खबर बन कर ही रह गयी. धरातल पर कब उतरेगी यह तो सरकार के मंसूबों की बात है. मंत्री जी कुरसी पर बैठ कर अपनी जिम्मेदारी की खानापूर्ति यूं ही कर लिया करते हैं. स्थानीय प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है.
कहते हैं नपं उपाध्यक्ष
इस संबंध में नगर पंचायत उपाध्यक्ष अनिल सिंह से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इसके लिए सांसद व विधायक भी जिम्मेवार हैं. नगर पंचायत के पास जितना फंड है उतना काम हो रहा है.