बांका: सदर अस्पताल बांका सहित जिले के अस्पतालों व उपस्वास्थ्य केंद्रों पर संविदा पर कार्यरत कर्मी के हड़ताल पर चले जाने से चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गयी है. कई आवश्यक सेवाएं बाधित हो चुकी है. मरीजों को इलाज कराने के लिए बाहर का रुख करना पड़ रहा है. अस्पताल का कार्य किसी प्रकार किया जा रहा है.
डाटा ऑपरेटर के नहीं रहने से मरीजों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है. बगैर पंजीयन का ही पूर्जा दिया जा रहा है. सोमवार को सदर अस्पताल में डेढ़ सौ मरीज इलाज के लिए पहुंचे जिसमें लगभग 30 महिलाएं भी शामिल है. साफ सफाई पर भी बुरा असर पड़ा है. हड़ताल के पहले दिन ही अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार लग गया है. मरीजों को इलाज कर रहे डॉ मदन पाठक ने बताया कि इमरजेंसी में ज्यादा परेशानी है. वैसे वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है. नियमित हुए ए गेड नर्स के योगदान के बाद उन्हें इमरजेंसी में लगाया गया है. अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 75 कर्मी हड़ताल पर है.
साथ ही आशा कार्यकर्ता व ममता भी हड़ताल पर है. अस्पताल को चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है लेकिन वह कारगर साबित नहीं हो पा रहा है. चिकित्सकों को खुद से ड्रेसिंग करना पड़ रहा है. गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को बेहतर चिकित्सा के लिए भागलपुर भेज दिया जा रहा है.
कहते हैं मरीज
जगतपुर से इलाज के लिए पहुंची मुन्नी देवी ने बताया कि इस वक्त कर्मियों के हड़ताल पर रहने की वजह से यहां ना ही पंजीयन हो पाया और ना ही समुचित इलाज हो पा रहा है. चिकित्सकों ने बताया कि इस वक्त सभी कर्मी हड़ताल पर है इस लिए उनका ड्रेसिंग नहीं हो पायेगा. हालांकि की काफी कोशिश के बाद उनके मरीज का ड्रेसिंग हो पाया. चुटिया के दिनेश मंडल ने बताया कि काफी मुश्किल के बाद तो एक पर्जी मिला. जिसके बाद चिकित्सक से सलाह लिये. चिकित्सक ने खून जांच कराने को कहा था लेकिन अस्पताल में खून जांच नहीं हुआ. उनको पैसे खर्च करके बाहर से खून जांच कराना पड़ा. अस्पताल के लोगों ने बताया कि इस वक्त संविदा पर बहाल कर्मी हड़ताल पर है. जांच घर को बंद कर दिया गया है.
विजय नगर के अनिल दास का कहना है कि वह यहां पर अपने मरीज को लेकर आये थे. परंतु यहां पर लेवर नहीं हो पाया. बताया गया कि यहां पर जांच घर वाले से लेकर आशा, ममता, लेवर रूम में संविदा पर कार्यरत कर्मी सहित कई अन्य अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर है. कोई सुविधा नहीं देखते हुए वह अपने मरीजों को बाहर ले कर जा सकते है.
बांका प्रखंड के लसकरी गांव की सुनीता देवी ने बताया कि वह अपने मरीज को लेकर प्रसव कराने के लिए आयी थी. उनका प्रसव यहां की कर्मियों के द्वारा कर दिया गया लेकिन कोई भी आशा और ममता मौके पर नहीं आयी. उनको यहां आकर थोड़ी परेशानी हुई.
इमरजेंसी में सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है : स्टाफ नहीं रहने की वजह से कभी भी हो हंगामा हो सकता है. वहीं लैब बंद होने से जांच की सुविधा यहां नहीं मिल पा रही है. जिससे चिकित्सा करने में परेशानी हो रही है.
मदन पाठक, चिकित्सा पदाधिकारी
कहते हैं सिविल सजर्न : उन्होंने बताया कि वह इस वक्त पटना के रास्ते पर है. बाद में बात करेंगे.
जितेंद्र कुमार, सीएस बांका.
