पत्ता बना कर करते हैं अपना गुजर-बसर

फोटो 19 बांका 10 : पत्ता बनाती महिला प्रतिनिधि, जयपुरनक्सल प्रभावित जयपुर ओपी क्षेत्र के दर्जनों आदिवासी गांवों में महिलाओं का मुख्य कार्य पत्ता बनाने का है. इससे ही उनका गुजर-बसर हो जाता है. आदर्श ग्राम पंचायत कोल्हासार के जोगीकुप्पा गांव के लील मुनी सोरेन, वार्ड सदस्या शुकर मुनी सोरेन, रूप मुनी हेंब्रम, बड़की मरांडी, […]

फोटो 19 बांका 10 : पत्ता बनाती महिला प्रतिनिधि, जयपुरनक्सल प्रभावित जयपुर ओपी क्षेत्र के दर्जनों आदिवासी गांवों में महिलाओं का मुख्य कार्य पत्ता बनाने का है. इससे ही उनका गुजर-बसर हो जाता है. आदर्श ग्राम पंचायत कोल्हासार के जोगीकुप्पा गांव के लील मुनी सोरेन, वार्ड सदस्या शुकर मुनी सोरेन, रूप मुनी हेंब्रम, बड़की मरांडी, मरांगकुड़ी हेंब्रम ने बताया कि सुबह पत्ता तोड़ने के लिए जंगल जाते हैं और दोपहर तक पत्ता तोड़ कर लौटते हैं. उसके बाद ही घर का कार्य करते हैं. शाम में तोड़े गये पत्ते को बुनने में लग जाते हैं. तेतरिया, मंझनियां, इंद्रावरण, मुरलीकेन, माथासार, लेटवा, भोड़ीसीमर सहित अन्य गांवों में पत्ता बनाने का कार्य आदिवासी महिलाओं द्वारा किया जाता है.क्या होती है इसमें कमाई 40 पत्ता का एक बंडल बना कर छह रुपये में बेचा जाता है. एक घंटे में पांच बंडल पत्ता बना पाते हैं. पत्ते की सेलिंग बंगाल, उड़ीसा, झारखंड आदि जगहों में की जाती है.

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