17 जून, 2014 को जिलेविया मोड़ धर्मशाला में रोड संवेदक, मुंशी एवं ड्राइवर पर हुए जानलेवा नक्सली हमले जैसी घटनाएं इसकी पुष्टि करती हैं. चार दिन पूर्व बारागांव में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत हो रहे काम को लेकर लेवी के लिए नक्सलियों द्वारा दबाव बनाया गया. इसके बाद लेवर, मुंशी कार्य छोड़ कर भाग गये. संवेदक ने भी जेसीबी, ट्रैक्टर, रोलर आदि मशीनों को कार्यस्थल से हटवा लिया. हालांकि नक्सली द्वारा संवेदक से लेबी मांगने की शिकायत कभी भी संवेदक द्वारा प्रशासन से नहीं की जाती है, लेकिन जब-जब संवेदक पर नक्सलियों द्वारा लेवी का दबाव होता है, तो पुलिस एवं खुफिया सूत्रों द्वारा इसकी गुप्त रूप से जांच की जाती है.
हालांकि लेवी देने का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आ पाता है. सूत्रों के अनुसार थाना क्षेत्र में दो गुटों द्वारा लेवी ली जाती है. एक नक्सली एरिया कमांडर मंटु खैरा एवं दूसरा बेलहर-झाझा सीमा क्षेत्र के नक्सली सह कुख्यात अपराधी काली यादव द्वारा. पुलिस इन दोनों के विरुद्ध सबूत जुटाने में लगी हुई है. दो माह पूर्व तत्कालीन ऑपरेशन एसपी अरुण कुमार ने लेबी देने वालों की सूची भी तैयार की थी. पर, इसका कोई परिणाम सामने नहीं आया.
