मैट्रिक से आगे नहीं पढ़ पायीं लड़कियां

बांका: प्रखंड क्षेत्र के जमुआ पंचायत काकारी झांक महादलित टोला मुख्यालय से महज 10 से 15 किमी दूर स्थित है. पर, यह गांव आज भी विकास से कोसों दूर है. शिक्षा व्यवस्था के नाम पर एकमात्र आंगनबाड़ी केंद्र है. हालांकि प्राथमिक विद्यालय की स्वीकृति मिली है, लेकिन भवन नहीं होने से पढ़ाई अन्यत्र स्थान पर […]

बांका: प्रखंड क्षेत्र के जमुआ पंचायत काकारी झांक महादलित टोला मुख्यालय से महज 10 से 15 किमी दूर स्थित है. पर, यह गांव आज भी विकास से कोसों दूर है. शिक्षा व्यवस्था के नाम पर एकमात्र आंगनबाड़ी केंद्र है.

हालांकि प्राथमिक विद्यालय की स्वीकृति मिली है, लेकिन भवन नहीं होने से पढ़ाई अन्यत्र स्थान पर की जाती है. सरकार इस वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए कई योजनाएं चला रही है. मुख्य धारा से जोड़ने के लिए गांवों में सड़क, बिजली, पानी एवं शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने को प्राथमिकता दी जा रही है. पर, लगता है कि यह प्राथमिकता इस गांव के लिए नहीं है. गांव के रंजीत कुमार दास, मंगरू दास ने बताया कि स्कूल नहीं होने से यहां कोई भी लड़की मैट्रिक से आगे की पढ़ाई नहीं की है.

वसंत दास ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए ककवारा जाना पड़ता है, लेकिन सड़क बेहद खराब है. सातवीं की छात्र सगम कुमारी ने कहा कि वह ककवारा पढ़ने जाती है. दूर होने के कारण परेशानी होती है. यदि गांव में ही विद्यालय की सुविधा होती तो बेहतर होता. बीरमा देवी ने बताया कि गांव की हालत बरसात के मौसम में आकर देखें, तो पता चलेगा कि हम लोग कैसे गुजर-बसर करते हैं. जोशी देवी, सूमो देवी ने बताया कि अगर देर रात में गांव के किसी की तबीयत खराब हो जाये, तो उसका भगवान ही मालिक है.

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