बांका में 150 गांवों की जिंदगी पर भारी बदुआ नदी, बारिश में टूटता संपर्क, जान जोखिम में डालकर नदी पार करते ग्रामीण

बांका जिले के बदुआ नदी पर पुल न होने से करीब 150 गांवों के हजारों लोगों की जिंदगी मुश्किलों से भरी है, खासकर बरसात के दिनों में. हजारों ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं. ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं.

बांका जिले के चांदन प्रखंड की दक्षिणी बारणे पंचायत अंतर्गत भैरोपुर और अलकडुमर गांव के बीच बदुआ नदी पर पुल नहीं होने से करीब 150 गांवों के हजारों लोगों की परेशानी बरसात में कई गुना बढ़ जाती है. नदी में पानी का स्तर बढ़ते ही इस रास्ते से आवागमन लगभग बाधित हो जाता है. ऐसे में ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी तेज बहाव के बीच नदी पार करने का जोखिम उठाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्थल निरीक्षण और नापी के बावजूद पुल निर्माण की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई है.

पानी बढ़ते ही थम जाती है गांवों की जिंदगी

बदुआ नदी पर पुल के अभाव में बरसात के दिनों में ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित हो जाता है. नदी में पानी बढ़ने के साथ रास्ता खतरनाक हो जाता है. रोजमर्रा के काम के लिए भी लोगों को इसी रास्ते का सहारा लेना पड़ता है. पानी का बहाव तेज होने पर दुर्घटना का खतरा बना रहता है.

सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार मरीजों को उठानी पड़ती है. आपात स्थिति में एंबुलेंस और अन्य वाहनों का गांवों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है.

स्कूल से अस्पताल तक पहुंचना बना चुनौती

कच्चा संपर्क पथ.

पुल नहीं होने का सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है. बाजार जाने से लेकर बच्चों के स्कूल पहुंचने और मरीजों को अस्पताल ले जाने तक लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है. बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर समस्या और गंभीर हो जाती है.

ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी. किसानों के लिए भी अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा.

कई बार हुई नापी, फिर भी नहीं शुरू हुआ काम

ग्रामीणों के अनुसार बदुआ नदी के इस घाट पर पुल निर्माण को लेकर कई बार विभागीय इंजीनियरों ने स्थल निरीक्षण किया है. कई बार नापी भी करायी गयी. इसके बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका.

हर बार ग्रामीणों को पुल निर्माण की उम्मीद बंधती है, लेकिन समय बीतने के साथ आश्वासन ही उनकी परेशानी का हिस्सा बन गया है. ग्रामीण अब सर्वे और आश्वासन के बजाय धरातल पर काम शुरू होने की मांग कर रहे हैं.

पुल बनने से 150 गांवों को मिलेगा सीधा फायदा

भैरोपुर, अलकडुमर, दक्षिणी बारणे, खेसर, महादेवपुर, करमाडीह, धनघरा, मिर्जापुर, बेलसंड, लदौर, पिपरौली, जमुआ और डुमरिया समेत करीब 150 गांव इस मार्ग से जुड़े हैं. इन गांवों की बड़ी आबादी आवागमन के लिए इस रास्ते पर निर्भर है.

पुल बनने से सिर्फ आवागमन आसान नहीं होगा, बल्कि बच्चों की शिक्षा, मरीजों की चिकित्सा, किसानों की उपज की बिक्री और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा. ग्रामीणों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

अब आश्वासन नहीं, पुल निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने बिहार सरकार, मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग से भैरोपुर-अलकडुमर के बीच बदुआ नदी पर जल्द पुल निर्माण की स्वीकृति देने और काम शुरू कराने की मांग की है.

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही समस्या का अब स्थायी समाधान जरूरी है. बरसात में हर साल जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी खत्म होनी चाहिए. उनकी मांग है कि इस बार केवल सर्वे और आश्वासन तक मामला सीमित न रहे, बल्कि पुल निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई शुरू हो.


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लेखक के बारे में

By दीपक चौधरी

दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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