सूरज उगने से पहले उठते हैं बांका के नौजवान सरहद पहुंचने की ललक में दौड़ जाते हैं कई कोस

विभांशु, बांका : देश की सरहद पर तैनात जवान प्रतिदिन जिंदगी-मौत से आंख-मिचौली खेलते हैं. काफी चुनौतिपूर्ण नौकरी में सेना की नौकरी मानी जाती है. कब दुश्मनों की गोली सेना के पास आ जाये, यह पता नहीं रहता है. इतने खतरनाक नौकरी के लिए भी आज गांव-गांव का युवा मतवाला बना बैठा है. दरअसल, युवाओं […]

विभांशु, बांका : देश की सरहद पर तैनात जवान प्रतिदिन जिंदगी-मौत से आंख-मिचौली खेलते हैं. काफी चुनौतिपूर्ण नौकरी में सेना की नौकरी मानी जाती है. कब दुश्मनों की गोली सेना के पास आ जाये, यह पता नहीं रहता है. इतने खतरनाक नौकरी के लिए भी आज गांव-गांव का युवा मतवाला बना बैठा है.
दरअसल, युवाओं में खाकी वर्दी पहनने का यह दिवानगी देश के प्रति उनका निश्चल प्रेम है. लिहाजा, प्रतिदिन देश की वर्दी पहनने के जुनून में युवा सूरज उगने से पहले कई कोस को मिनटों में धाप लेते हैं.
जी हां, जिले के प्रत्येक गांव में सेना में नौकरी के लिए अधिकांश युवा तैयारी कर रहे हैं. डाक्टर, इंजीनियर, अधिकारी से कहीं ज्यादा युवाओं की पहली पसंद आर्मी और अर्द्धसैनिक बल हैं. जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थिति मजलीशपुर गांव पहुंचने पर आपको जुनून के इंतहा का अंदाजा लग जायेगा. यहां प्रतिदिन सेना भर्ती की ट्रेनिंग होती है.
न केलव दौड़, बल्कि ऊंची कूद, लंबी कूद, रस्सी कूद, गोला फेकने से लेकर तमाम तरह के कसरत रोजाना सुबह-शाम दोनों समय होता है. यहां के सीआइएसएफ जवान वासुदेव यादव जब-जब छुट्टी में घर आते हैं, तो उनका ज्यादा समय युवाओं को प्रशिक्षण देने में ही गुजर जाता है.
शारीरिक दक्षता के साथ परीक्षा की भी तैयारी
न केवल शारीरिक दक्षता बल्कि प्रायोगिक परीक्षा में भी दक्ष होने के लिए युवा अलर्ट रहते हैं. सुबह-शाम शारीरिक दक्षता को परिपक्व बनाने के अतिरिक्त बचने वाले समय में युवा कोचिंग व घर में बैठकर सामान्य ज्ञान, करेंट अफेयर्स, रिजनिंग और गणित का हिसाब-किताब लगाते हैं. मसलन, सभी ने अपना डेली रुटिंग तैयार कर लिया है.

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