औरंगाबाद: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल पर शिक्षिका को डीएफओ ने किया सम्मानित

प्राथमिक विद्यालय देवरिया रुस्तम की शिक्षिका फरहाना कादरी बच्चों में पर्यावरण संरक्षण और 'सेव ट्री' के प्रति जागरूकता लाने के लिए रचनात्मक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं. उनके इस सराहनीय प्रयास को डीएफओ रूचि सिंह ने सम्मानित किया है.

Aurangabad News: पेड़ केवल पर्यावरण की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं. इसी सोच को बच्चों के मन में संस्कार के रूप में विकसित करने का सराहनीय प्रयास प्राथमिक विद्यालय देवरिया रुस्तम की शिक्षिका फरहाना कादरी कर रही हैं. पर्यावरण संरक्षण और 'सेव ट्री' विषय पर बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से जागरूक करने की उनकी अभिनव पहल को देखते हुए डीएफओ रूचि सिंह ने उन्हें सम्मानित किया है.

गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में जगा रहीं प्रकृति प्रेम

फरहाना कादरी केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित शिक्षा में विश्वास नहीं रखतीं, बल्कि बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देने पर विशेष जोर देती हैं. 'सेव ट्री' मुहिम के तहत उन्होंने विद्यालय में रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन कराया, जिनके माध्यम से बच्चों को पेड़ों का महत्व, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और हरियाली बचाने का संदेश दिया गया. इन गतिविधियों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी लिया.

प्रयास पर हर ओर मिली सराहना

शिक्षिका फरहाना कादरी ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी इन गतिविधियों का वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया. वीडियो में बच्चों का उत्साह, पेड़ों के प्रति उनका लगाव और पर्यावरण बचाने का संदेश लोगों को काफी पसंद आया. सोशल मीडिया पर इस पहल की व्यापक सराहना हुई और लोगों ने इसे अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणादायक बताया.

डीएफओ ने किया सम्मानित

पर्यावरण संरक्षण के प्रति बच्चों को जागरूक करने और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने के उत्कृष्ट प्रयास के लिए डीएफओ रूचि सिंह ने फरहाना कादरी को सम्मानित किया. इस दौरान उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि विद्यालय स्तर पर इस तरह की पहल लगातार होती रहे, तो आने वाली पीढ़ी पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनेगी.

शिक्षा के साथ जिम्मेवार नागरिक बनाने का प्रयास

फरहाना कादरी समय-समय पर विद्यालय में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन कर बच्चों को नई सीख देने का प्रयास करती रहती हैं. उनका मानना है कि बच्चों में बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे संस्कार विकसित किए जाएं, तो वे भविष्य में बेहतर नागरिक बन सकते हैं. उनका यह प्रयास न केवल विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह जीवन और प्रकृति दोनों के प्रति संवेदनशीलता का भाव पैदा करे.


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लेखक के बारे में

Author: Sudhir kumar singh

Published by: Vikash Jha

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