ओबरा. प्रखंड के भास्कर टोला, नावाडीह गांव में बिहार राज्य चिकित्सा आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड द्वारा कराए जा रहे उप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) के निर्माण कार्य पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. करीब 45 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस भवन में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया गया है.
ग्रामीणों की शिकायत पर की गई पड़ताल के दौरान निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई खामियां सामने आने का दावा किया गया.
प्राक्कलन के अनुसार काम नहीं होने का आरोप
ग्रामीण अशोक शर्मा, विद्या शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, ननकू सिंह, अनिल पासवान, नागेश्वर साव, भारत राम सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण एमबी (मेजरमेंट बुक) और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार नहीं किया जा रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में पुराने सीमेंट और निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर असर पड़ सकता है.
भवन में दरार और अधूरे काम को लेकर उठे सवाल
समाजसेवी अशोक कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की लंबे समय की मांग के बाद गांव में स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण कार्य में अनियमितता बरती जा रही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि शौचालय का निर्माण अधूरा है, भवन तक पहुंचने के लिए रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई है. इसके अलावा प्लिंथ में दरारें दिखाई दे रही हैं और फर्श भी कई जगह टूटने लगा है.
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम के बावजूद निर्माण कार्य लगभग बंद पड़ा है और भवन अधूरा छोड़ दिया गया है. उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई तो सरकारी राशि का दुरुपयोग हो सकता है.
ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर वे धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.
अधिकारियों ने जांच का दिया भरोसा
इस संबंध में विभाग के कनीय अभियंता राजीव कुमार राज से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार किया.
वहीं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विक्रम कुमार सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी. यदि शिकायत सही पाई जाती है तो दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी.
गौरतलब है कि प्रखंड क्षेत्र में पहले भी कई निर्माण कार्यों में अनियमितता की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं.
