बिहार में शिक्षा व्यवस्था हमेशा से चर्चा का विषय रही है. सरकार लगातार दावा करती रही है कि राज्य में स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. बच्चों को बेहतर भविष्य देने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और गांव-गांव तक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालय खोले गए हैं. लेकिन कई जगहों पर जमीनी हकीकत सरकार के दावों से अलग तस्वीर दिखाती है.
औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के उत्तरी उमगा पंचायत अंतर्गत राजकीय मध्य विद्यालय अंजनवा में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है. यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. विद्यालय में पर्याप्त बेंच-डेस्क नहीं होने के कारण बच्चे मजबूरी में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं. इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
300 बच्चों के लिए संसाधनों की कमी बनी समस्या
राजकीय मध्य विद्यालय अंजनवा में कक्षा पहली से आठवीं तक करीब 300 छात्र-छात्राओं का नामांकन है. बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय में कुल नौ शिक्षक कार्यरत हैं. विद्यालय में 14 कमरे उपलब्ध हैं, लेकिन फर्नीचर की कमी के कारण बच्चों को बैठने की बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है.
कई कक्षाओं में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं. इससे खासकर छोटे बच्चों को काफी परेशानी होती है. गर्मी और ठंड के मौसम में फर्श पर बैठकर पढ़ना उनके लिए और मुश्किल हो जाता है. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को बेहतर माहौल मिलने से उनकी पढ़ाई में सुधार हो सकता है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी उनकी पढ़ाई में बाधा बन रही है.
विषयवार शिक्षकों की कमी से बढ़ी परेशानी
विद्यालय में कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. इन कक्षाओं के लिए मात्र दो शिक्षक पदस्थापित हैं. इनमें एक गणित और एक सामाजिक विज्ञान के शिक्षक शामिल हैं. हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी है.
विषयवार शिक्षक नहीं होने के कारण छात्रों को सभी विषयों की पढ़ाई सही तरीके से नहीं मिल पा रही है. इससे अभिभावकों में भी चिंता बढ़ रही है. उनका कहना है कि माध्यमिक स्तर की पढ़ाई के लिए सभी विषयों के शिक्षकों की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है.
शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
विद्यालय में शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से छात्र-छात्राओं को परेशानी होती है. खासकर छात्राओं को इससे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा विद्यालय की बाउंड्री वॉल भी काफी नीची है, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
स्थानीय लोगों के अनुसार छुट्टी के बाद विद्यालय परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है. इससे विद्यालय की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है. ग्रामीणों ने विद्यालय की बाउंड्री वॉल को ऊंचा कराने की मांग की है.
प्रधानाध्यापक ने विभाग से लगाई मदद की गुहार
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी समस्या बेंच-डेस्क की कमी है. उन्होंने कहा कि फर्नीचर नहीं होने के कारण बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है.
उन्होंने बताया कि विद्यालय की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल को ऊंचा करना भी जरूरी है. इसके अलावा विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता के लिए विभाग को जानकारी दी गई है.
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन और शिक्षा विभाग से विद्यालय की समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की है, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके और सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके.
