Sanitation workers' strike : औरंगाबाद नगर परिषद क्षेत्र में सफाईकर्मियों की हड़ताल शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रही, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. सुबह होते ही बड़ी संख्या में सफाईकर्मी सड़कों पर उतर आए और नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. हड़ताली कर्मियों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.
प्रदर्शन के दौरान सफाईकर्मियों ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और मुख्य पार्षद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से कम मजदूरी और अस्थायी नौकरी की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है.
कम मजदूरी से नाराज कर्मी, वेतन बढ़ाने की मांग
सफाईकर्मियों ने बताया कि फिलहाल उन्हें प्रतिदिन 428 रुपये मजदूरी मिलती है, जो महंगाई के इस दौर में बेहद कम है. उनका कहना है कि इस राशि में परिवार चलाना तो दूर, खुद का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है.
कर्मियों ने मांग रखी है कि उनका मासिक वेतन 20 से 25 हजार रुपये तय किया जाए और सभी सफाईकर्मियों की नौकरी स्थायी की जाए. उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे.
चोरी-छिपे कचरा उठाने का आरोप
हड़ताल के बीच सफाईकर्मियों ने नगर परिषद प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए. उनका कहना है कि हड़ताल के बावजूद प्रशासन रात के समय जेसीबी मशीनों के जरिए कचरा उठवा रहा है.
कर्मियों का आरोप है कि इस तरह मशीनों का इस्तेमाल कर उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने इस रवैये में बदलाव नहीं किया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और परिवार के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा.
हड़ताल का शहर पर दिख रहा असर
लगातार तीसरे दिन सफाई कार्य ठप रहने से शहर के कई मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर कचरे का ढेर लग गया है. जगह-जगह फैली गंदगी से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं. गंदगी बढ़ने से बीमारी फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है.
300 से ज्यादा कर्मी हड़ताल पर, समाधान का इंतजार
गौरतलब है कि बुधवार सुबह से नगर परिषद के एनजीओ के तहत काम करने वाले 300 से अधिक सफाईकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. अब तक प्रशासन और कर्मियों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है.
औरंगाबाद शहर में रोजाना करीब 25 से 30 टन कचरा निकलता है, जिसकी सफाई पूरी तरह इन कर्मियों पर निर्भर रहती है. ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर शहर की व्यवस्था और बिगड़ने की आशंका है.
प्रदर्शन में मिथुन कुमार, संजय कुमार, सुरेश कुमार, विनय डोम, उमेश कुमार और सागर कुमार समेत बड़ी संख्या में सफाईकर्मी शामिल रहे. अब शहरवासियों की नजर प्रशासन की अगली पहल पर टिकी है कि कब इस संकट का समाधान निकलता है.
