औरंगाबाद: पोषण योजना में लापरवाही पर पांच टीबी सुपरवाइजरों का मानदेय स्थगित, डीएम ने दिखाई सख्ती

औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने टीबी मुक्त भारत अभियान में धीमी प्रगति पर सख्त रुख अपनाया है. निक्षय पोषण योजना के लाभार्थियों के बैंक भुगतान में घोर लापरवाही के कारण नवीनगर, गोह, रफीगंज, दाउदनगर एवं सदर प्रखंड के सीनियर टीबी सुपरवाइजरों का मानदेय तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है. सभी प्रखंडों को निर्धारित लक्ष्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

Aurangabad News: टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं मिलने पर औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. निक्षय पोषण योजना के लाभार्थियों के बैंक भुगतान में घोर लापरवाही बरतने पर नवीनगर, गोह, रफीगंज, दाउदनगर एवं सदर प्रखंड के सीनियर टीबी सुपरवाइजर (एसटीएस) का मानदेय तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का कड़ा निर्देश दिया गया. इसके साथ ही सभी प्रखंडों को अभियान में तेजी लाकर निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने को कहा गया है.

एकतालीस फीसदी लोगों का ही हुआ नामांकन

औरंगाबाद समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में निक्षय नामांकन, एक्स-रे जांच, नाट टेस्टिंग, डिफरेंशिएटेड टीबी केयर तथा निक्षय पोषण योजना की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया. समीक्षा में बताया गया कि जिले में 6,43,143 लोगों के निक्षय नामांकन के बड़े लक्ष्य के विरुद्ध अब तक केवल 2,65,733 यानी महज 41 प्रतिशत लोगों का ही नामांकन हो सका है. इसमें हसपुरा 54 प्रतिशत, देव 48 प्रतिशत और दाउदनगर 47 प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर रहे, जबकि रफीगंज 34 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सबसे पीछे पाया गया.

सिर्फ छह प्रतिशत लोगों का हुआ एक्स-रे

औरंगाबाद जिले में एक्स-रे जांच की समीक्षा के दौरान पाया गया कि निक्षय नामांकित 2,65,733 व्यक्तियों में से केवल 15,478 यानी महज छह प्रतिशत लोगों का ही एक्स-रे परीक्षण किया गया है. जिलाधिकारी ने इस बेहद लचर स्थिति पर नाराजगी जताते हुए सभी प्रखंडों में एक्स-रे जांच की संख्या युद्धस्तर पर बढ़ाने और संभावित टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है ताकि इस जानलेवा बीमारी के फैलाव को समय रहते रोका जा सके.

गोह व हसपुरा को प्रदर्शन सुधारने की चेतावनी

औरंगाबाद के अधिकारियों ने बताया कि नाट टेस्टिंग में जिले की कुल उपलब्धि संतोषजनक रही है, जहाँ 900 के निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 872 यानी 97 प्रतिशत परीक्षण सफलतापूर्वक किए गए हैं. इनमें रफीगंज, मदनपुर, नबीनगर, दाउदनगर तथा डीटीसी औरंगाबाद ने अपने तय लक्ष्य से अधिक उपलब्धि दर्ज की है, जबकि फिसड्डी रहने वाले गोह और हसपुरा प्रखंड को अपने खराब प्रदर्शन में तुरंत सुधार लाने का कड़ा निर्देश दिया गया है. इसके अलावा डिफरेंशिएटेड टीबी केयर में 653 मरीजों का भारी बैकलॉग पाया गया है.

पंद्रह सौ दो मरीजों को ही मिल रहा लाभ

औरंगाबाद जिले में निक्षय पोषण योजना की समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि वर्ष 2025 से अब तक 3,390 पात्र मरीजों में से केवल 1,502 को ही इस योजना का सरकारी लाभ मिल सका है, जबकि 1,888 गंभीर मरीजों का वित्तीय भुगतान तकनीकी लापरवाही के कारण लंबित पाया गया है. सर्वाधिक लंबित मामले डीटीसी औरंगाबाद, दाउदनगर और रफीगंज में मिले. बैठक में सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार, डीपीएम मोहम्मद अनवर आलम, जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. रवि रंजन सहित कई अन्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित थे.

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By Sudhir kumar singh

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